अपंग हो रहा मुझे मेरी भांजी ने दी आयुष ग्राम चित्रकूट की जानकारी !!


क्या ये सही नहीं है !!
किडनी और हृदय रोगों की चिकित्सा आयुष में बहुत ही उत्कृष्ट है, ऐसे रोगी जिनकी अंग्रेजी दवा खाते - खाते शरीर की जीवनीय शक्ति और व्याधिक्षमत्व शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो जाती है ऐसे रोगियों को आयुष चिकित्सा बहुत ही परिणामोत्पादक, प्रभावशाली और जीवनदायिनी है, किन्तु लोगों में जागरूकता का आभाव है जन - जन को इसका प्रचार करना चाहिए। आज अंग्रेजी इलाज की स्थिति यह है कि पहले एक गोली से इलाज शुरू होता है धीरे-धीरे वह हार्टकिडनीलिवर का रोगी बन जाता है और फिरकभी भी बन्द न होने वाली दवाओं का सिलसिला चलने लगता है। जबकि आयुष चिकित्सा में दवायें धीरे-धीरे घटते-घटते बिल्कुल बन्द हो जाती हैं। ऐसे में आप सभी का पावन कर्तव्य बनता है कि पीड़ित मानव का सही मार्गदर्शन करें और उन तक जानकारी पहुँचायें, ताकि ऐसे पीड़ित मानव का कल्याण हो सके और लोग अंग्रेजी दवाओं के जाल से बच सकें 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)

कृष्ण मोहन जी साथ में उनकी भांजी शलिनी दीक्षित


मैं कृष्ण मोहन (41 वर्ष) 52 मस्जिद वाली गली
, गोविंद नगर सिधौल, सीतापुर (उ.प्र.) से हैं। इस समय लखीमपुर खीरी में हम पति-पत्नी सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।

मुझे 1 साल से गैस की समस्या बहुत ज्यादा रहने लगी, मल बदबूदार बहुत रहता था, भोजन का पाचन ठीक से नहीं हो रहा था, कब्जियत रहती थी। जुलाई माह में बायें हाथ में शून्यता आ गयी, मैंने सीतापुर के डॉक्टर पंकज अवस्थी को दिखाया, वहाँ 15 दिनों तक दवायें चलीं परन्तु कोई भी आराम नहीं मिला।

     धीरे-धीरे  समस्या बढ़ती जा रही थी, मेरे पूरे शरीर में शून्यता आ गयी, बायें हाथ में कम्पन होने लगा, बायां हाथ बिल्कुल काम नहीं करने लगा, उठने बैठने में समस्या होने लगी, पकड़कर चलना पड़ता था। अंग्रेजी दवायें पर दावायें चलती जा रही थी, उधर मैं अपंग होता जा रहा था।


     अब मुझे लखनऊ में डॉक्टर तरुण के पास ले गये, वहाँ पर एमआरआई करवाई गयी, एमआरआई में डॉक्टर ने बताया की गर्दन के पास की नसें दब गयीं हैं जिसमें पूरे शरीर में समस्या हो रही हैं। लखनऊ में 15 दिनो तक अंग्रेजी दवायें चली, हल्का आराम मिला लेकिन वहाँ पर ऑपरेशन के लिए बोल दिया गया पर यह भी कह दिया की कोई गारण्टी नहीं की आप ऑपरेशन से आप ठीक हो जायें। मेरी पत्नी और बच्चे सब परेशान थे, मेरी दशा और दिन पर मुझे अपंग होते देखकर मेरी भांजी आचार्या शालिनी दीक्षित को पता चला तो उसने कहा की चित्रकूट में आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय है

     वे वहाँ रह चुकीं थीं, उन्होने बताया की न्यूरो हार्ट, किडनी रोगों का बहुत ही अच्छा इलाज  है। वह भी बिना ऑपरेशन।

     मैं अपनी भांजी शालिनी दीक्षित को लेकर पत्नी के साथ भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के आयुष ग्राम संस्थान पहुँचा, रजिट्रेशन हुआ और फिर ओपीडी-2 में डॉक्टर वाजपेयी जी के पास बुलाया गया उन्होने मुझे देखा और जाँचें देखकर कहा की मिश्रा जी आप बिल्कुल परेशान न हों , आपको कोई ऑपरेशन नहीं करवाना पड़ेगा और कहा आपको 8 माह तक दवा करानी होगी औए एक-एक माह के अन्तर से आयुष ग्राम में रहना होगा, यहाँ कुछ थैरेपी, अभ्यंग, बस्तियाँ, स्वदेन आदि होगीं अच्छा परिणाम आयेगा। हर माह 10% आराम मिलते-मिलते आप 95% ठीक हो जायेंगे। यह सुनकर हमारी खुशी का ठिकाना न रहा, एक आशा की किरण दिखायी दी। हम भर्ती हो गये, पूरा प्राकृतिक वातावरण, साफ-स्वच्छ हवादार बड़ा कमरा मिला। प्रदूषण का नामोनिशान नहीं।  जब मुझे आयुष ग्राम लेकर आये उस समय मैं चल नही पता था, नीचे उठ बैठ नहीं पता था, बायें हाथ में कम्पन था, बायां हाथ बिल्कुल काम नहीं कर पा रह था, पेट की समस्या से तो मैं एक साल से बहुत परेशान था ही।

मेरी कुछ जाँचे हुयीं, रोज़-रोज़ अलग अलग डॉक्टर आते, बड़ी सौम्यता से बातचीत होती, इलाज लिखते, नर्से दवा और उपचार देती । यही चलता रहा। न बोतल, न इंजेक्शन। रोज़-रोज़ मुझे लाभ होता जाता और चौथे दिन मैं बिना सहारे के चलने लगा।     आज दो सप्ताह बाद- अब तो मैं अपने आप से चलने लगा हूँ, अब कोई सहारा नहीं लेना पड़ता। अभी बायें हाथ में कम्पन रहता है, बायाँ जो काम नहीं करता था अब उसमे पहले से ज्यादा आराम है। अब मैं अपने से उठने बैठने लगा हूँ ।

     मुझे यहाँ 2 सप्ताह रुकने के बाद बिल्कुल भी अस्पताल जैसा नहीं लगा, ऐसा लगा मानो कहीं हम घूमने आयें हों, इतना अच्छा यहाँ का वातावरण, साफ-सफाई, यहाँ पर सभी को बोलने का तरीका सबके प्रति अपनापन बहुत अच्छा लगता था

     सर ने कहा था की हर माह 10 से 15 प्रतिशत आराम मिलने की बात कही थी पर मुझे पेट की समस्या में 100% आराम और 30 प्रतिशत तक मैं बढ़िया हो गया। मैं बिना सहारे चलने लगा, लोग कहते थे कि यह तो अपंग हो जाएगा उससे मैं बच गया। मैं कहता हूँ कि यदि मेरे जैसे कोई पीड़ित हों तो अवश्य बतायें।

     मैं डॉक्टर वाजपेयी साहब और आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट के पूरे स्टॉफ का आभारी हूँ, यहाँ आकर मैं ऑपरेशन से बच गया और अपंगता से बच गया। एक माह बाद 2 सप्ताह हेतु पुनः आऊँगा।

कृष्ण मोहन,

52 मस्जिद वाली गली, गोविंद नगर सिधौल, सीतापुर (उ.प्र.) 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन-आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                एम.डी. (एस.&पी.मेडिसिन-आयु0)    
                             
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा-आयुर्वेद) 
           

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