यूरिया ९९, क्रिटनीन ५ हुआ : आयुष ग्राम चित्रकूट से!!


क्या ये सही नहीं है !!
किडनी और हृदय रोगों की चिकित्सा आयुष में बहुत ही उत्कृष्ट है, ऐसे रोगी जिनकी अंग्रेजी दवा खाते - खाते शरीर की जीवनीय शक्ति और व्याधिक्षमत्व शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो जाती है ऐसे रोगियों को आयुष चिकित्सा बहुत ही परिणामोत्पादक, प्रभावशाली और जीवनदायिनी है, किन्तु लोगों में जागरूकता का आभाव है जन - जन को इसका प्रचार करना चाहिए। आज अंग्रेजी इलाज की स्थिति यह है कि पहले एक गोली से इलाज शुरू होता है धीरे-धीरे वह हार्टकिडनीलिवर का रोगी बन जाता है और फिरकभी भी बन्द न होने वाली दवाओं का सिलसिला चलने लगता है। जबकि आयुष चिकित्सा में दवायें धीरे-धीरे घटते-घटते बिल्कुल बन्द हो जाती हैं। ऐसे में आप सभी का पावन कर्तव्य बनता है कि पीड़ित मानव का सही मार्गदर्शन करें और उन तक जानकारी पहुँचायें, ताकि ऐसे पीड़ित मानव का कल्याण हो सके और लोग अंग्रेजी दवाओं के जाल से बच सकें 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)


                मेरे बड़े भाई हबीबुर्रहमान (४६ वर्ष) को सिर्फ गैस की समस्या रहती थी लेकिन मेरे यहाँ ननिहाल से ही मेरी माँ की बड़ी बहन को भी किडनी की समस्या थी और फिर मेरी दो बड़ी बहनों को भी किडनी की समस्या थी जिससे वह दोनों की मृत्यु हो चुकी है, उसके बाद मेरे एक भांजे को भी यही समस्या है, इससे मुझे लगता है कि यह बीमारी अनुवांशिक है।

            मेरे बड़े भाई को एक दिन बोलने में जुबान लड़खड़ाने लगी, तो मुझे तो पहले से ही मुझे किडनी के बारे में जानकारी थी तो मैं अपने भाई को सीधे अपने भांजे की पैथालॉजी ले गया, वहाँ पर सारी जाँचें हुयीं तो जाँच में क्रिटनीन ७.०, यूरिया १९० आया। तो मैंने सेण्ट्रल हॉस्पिटल हल्द्वानी के डॉ. भंडारी जी के पास लेकर गया, उन्होंने डायलेसिस के लिए बोल दिया, मैंने अपने भाई को डायलेसिस के लिए वहाँ से लेकर काशीपुर के एम.पी. हॉस्पिटल गया, वहाँ पर १ डायलेसिस करवाई और १ माह दवायें खिलायीं, फिर से अगले माह मैं सेण्ट्रल हॉस्पिटल लेकर पहुँचा, वहाँ पर डॉक्टर ने जाँच देखकर कहा अगर दवाओं से यूरिया, क्रिटनीन नहीं बढ़ता है तो दवायें चलती रहेंगी और अगर दवायें चलने के बाद भी बढ़ता है तो पूरी जिन्दगी डायलेसिस ही करवानी पड़ेगी।

            मैं बहुत परेशान था कि मैं अपनी दोनों बड़ी बहनों की डायलेसिस करवाते-करवाते ही उन्हें खो दिया, कहीं ऐसा ही मेरे भाई के साथ भी न हो, लेकिन मैंने ७ माह अंग्रेजी दवायें चलायीं, कोई डायलेसिस की जरूरत तो नहीं पड़ी लेकिन समस्यायें धीरे-धीरे बड़ती जा रही थीं।

            तभी बीच में लॉक डाउन हो गया, जिससे कहीं दिखा नहीं पाया, सिर्फ दवा का पर्चा दिखा-दिखाकर दवायें लेकर देता रहा। उसी समय मुझे मेंहदी हसन जो अपनी डायलेसिस के झंझट से निजात पाई है के द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला।

            मैं अपने भाई को १० जुलाई २०२० को लेकर आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट पहुँचा, रजिस्ट्रेशन करवाया गया फिर नम्बर आने पर ओपीडी-२ में डॉ. वाजपेयी जी के पास बुलाया गया। उन्होंने सारी जाँचें देखीं और कुछ जाँचें करवायीं, उस समय क्रिटनीन ९.८ यूरिया २६६.३ आया। लेकिन उन्होंने कहा कि आप परेशान न हों यहाँ पर २ सप्ताह भर्ती रहकर पंचकर्म थैरेपी व दवायें चलेंगी, शायद डायलेसिस की जरूरत न पड़े।

            मैंने उनकी बात मानकर १५ दिन रहकर चिकित्सा करवाई, मेरे भाई को बहुत आराम मिला और जाँचें भी अच्छी आने लगीं, उन्होंने कहा कि अब १ माह घर में दवायें खाने के बाद फिर से १५ दिनों के लिए यहाँ रहकर चिकित्सा करवानी पड़ेगी।

            मैं जब अपने भाई को लेकर यहाँ आया था उस समय पूरे शरीर में दर्द, शायंकालीन होते ही ज्वर आ जाता था, भूख बिल्कुल नहीं लग रही थी, पेशाब से खून जा रहा था, नींद नहीं आ रही थी, कमजोरी बहुत थी जिससे बिस्तर से उठ भी नहीं पाते थे। लेकिन २ सप्ताह की चिकित्सा से इन सभी समस्याओं में आराम मिल गया।

            १ माह बाद दूसरी बार फिर १५ दिनों की चिकित्सा करवाई गयी, इस समय मेरे भाई को ८० % से ज्यादा आराम है और १६ सितम्बर २०२० की जाँच में क्रिटनीन ५.०, यूरिया ९९.० आ गया, जिससे उन्होंने कह दिया अब बिल्कुल डायलेसिस की जरूरत नहीं पड़ेगी।

            मैं यह सुनकर बहुत खुश हो गया और मुझे पूर्ण विश्वास हो गया कि मेरे भइया यहीं से पूर्ण स्वस्थ हो जायेंगे। जो अंग्रेजी डॉक्टर १ साल में अपनी दवाओं से कुछ नहीं कर पाये, वहीं आज अल्ला ताला की दुआ से और यहाँ के डॉक्टर साहब की दवाओं व पंचकर्म थैरेपी से १५ दिनों में ही आराम मिल गया।

            मैं बहुत खुश हूँ कि मरे भाई की डायलेसिस तो छूट ही गयी और सारी समस्यायें भी खत्म हो गयीं और जाँचें भी बहुत अच्छी आ रही हैं, अंग्रेजी दवायें सारी बन्द हैं, मैं डॉक्टर वाजपेयी जी और पूरे स्टॉप को धन्यवाद देता हूँ कि जो अंग्रेजी डॉक्टर ने पूरी जिन्दगी डायलेसिस की सलाह दी और अंग्रेजी दवायें खाते रहने को कहा था उन सबसे आयुष ग्राम चित्रकूट में आने से निजात मिल गयी।

मो. शाहिद बड़े भाई मो. हबीबुर्रहमान

वार्ड नं.-१७, ठाकुरद्वार, मुरादाबाद


डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                  एम.डी.(आयु.) आ. 

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