क्या ये सही नहीं है !!
किडनी और हृदय रोगों की चिकित्सा आयुष में बहुत ही उत्कृष्ट है, ऐसे रोगी जिनकी अंग्रेजी दवा खाते - खाते शरीर की जीवनीय शक्ति और व्याधिक्षमत्व शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो जाती है ऐसे रोगियों को आयुष चिकित्सा बहुत ही परिणामोत्पादक, प्रभावशाली और जीवनदायिनी है, किन्तु लोगों में जागरूकता का आभाव है जन - जन को इसका प्रचार करना चाहिए। आज अंग्रेजी इलाज की स्थिति यह है कि पहले एक गोली से इलाज शुरू होता है धीरे-धीरे वह हार्टकिडनीलिवर का रोगी बन जाता है और फिरकभी भी बन्द न होने वाली दवाओं का सिलसिला चलने लगता है। जबकि आयुष चिकित्सा में दवायें धीरे-धीरे घटते-घटते बिल्कुल बन्द हो जाती हैं। ऐसे में आप सभी का पावन कर्तव्य बनता है कि पीड़ित मानव का सही मार्गदर्शन करें और उन तक जानकारी पहुँचायें, ताकि ऐसे पीड़ित मानव का कल्याण हो सके और लोग अंग्रेजी दवाओं के जाल से बच सकें 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)


मैं लल्लन सिंह, मेरे बड़े भाई इन्द्रभान सिंह (उम्र ४२), निवासी- छौसट (कचूट), रीवा (म.प्र.) से हैं। मेरे बड़े भाई को ३ साल से अर्श की समस्या थी, कुछ दवायें ऐसे ही एक-दो ले लेने से आराम मिल जाती था। सबसे ज्यादा उन्हें सभी नसों की लत थी शराब, गाँजा, कोरेक्स सीरप बहुत ज्यादा मात्रा में लेना, नशीली दवायें बहुत लेते थे। लगभग सभी नसों के लती हैं। २ साल से कुछ भी किसी के बोलने पर ३-४ बार में सुनते थे, किसी काम में मन नहीं लगाते थे, चिड़चिड़ापन बहुत था तो हम लोग सोचते थे कि दिन-रात तो नसे में घूमते हैं तो शायद इसी से ऐसा हो रहा होगा।

            फिर अचानक २० मई २०२० को ब्लडप्रेशर व सुगर बहुत लो हो गया और कमजोरी, आलस्य तथा पूरे शरीर में सूजन आ जाती थी। पैरों में सूजन आ गयी तो मैं अपने भाई को २७ मई २०२० को रात में रीवा के संजय गाँधी हॉस्पिटल ले गया, वहाँ पर ५ दिन की अंग्रेजी दवायें दी गयीं, लेकिन ३ दिन अटैक जैसा आ गया, बहुत ज्यादा उल्ट-सीधा, अनाप-सनाप बातें करने लगे और पूरा शरीर बिल्कुल अकड़ जैसा गया। मैं तुरन्त फिर से रीवा के संजय गाँधी हॉस्पिटल में लेकर भगा, वहाँ पर सारी जाँचें हुयीं और तभी किडनी की समस्या का पता चला, ३ दिन भर्ती रखने के बाद डॉक्टरों ने डायलेसिस करवाने के लिए बोला, तो मैं डायलेसिस के लिए जुबलपुर लेकर पहुँचा, वहाँ पर ७ दिन भर्ती रखा गया, डेढ़ माह तक दवायें चलीं लेकिन हालत और ज्यादा बिगड़ती चली गयी, याददाश्त बहुत कम हो गयी, कमजोरी आती गयी, चलने में समस्या होने लगी, लेकिन जाँच में हल्का आराम हुआ था।

            फिर मैं रीवा सजंय गाँधी हॉस्पिटल में ज्यादा समस्या होने पर १ रात भर्ती रखा और १ डायलेसिस भी करवाई और फिर रीवा मेडिकल कॉलेज में डायलेसिस के लिए ले गया, वहाँ पर ५ डायलेसिस हुयीं और दवायें चलीं और डॉक्टर ने १ हफ्ते में २ डायलेसिस के लिए व खून चढ़वाते रहने, पूरी जिन्दगी डायलेसिस के सहारे ही रहना पड़ेगा ऐसा एलोपैथिक डॉक्टरों ने बोला।

            तभी मुझे मेरे यहाँ के एक पड़ोसी व्यक्ति के द्वारा जो अपना इलाज करवा चुके हैं के द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला, मेरे फैमिली डॉ. शारदानन्द मिश्र जी ने भी जानकारी दी और तुरन्त आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट आने के लिए कहा।

            मैं अपने बड़े भाई को लेकर आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट पहुँचा, रजिस्ट्रेशन हुआ और ओपीडी-२ में डॉ. वाजपेयी जी के पास भेजा गया, उन्होंने सारी जाँचें देखीं और २-३ सप्ताह भर्ती रखकर चिकित्सा करवाने की सलाह दी। मैं अपने भइया को भर्ती कर चिकित्सा करवाई, उस समय जाँच में क्रिटनीन ४.९, यूरिया १२५.०, सोडियम १२८.० पोटेशियम ४.२, हीमोग्लोबिन ५.६ आया।

            उस समय कमजोरी बहुत लग रही थी और याददाश्त बहुत कम होती जा रही थी, चिड़चिड़ापन, नींद नहीं आ रही थी, आँख में समस्या हो रही थी, डायलेसिस तो चल ही रही थी और सुनाई कम दे रहा था, आलस्य बहुत रहता था।

            इन सभी समस्याओं के चलते मैंने यहाँ दो हफ्ते भर्ती रखकर चिकित्सा करवाई, मेरे भइया को २ सप्ताह में बहुत आराम मिल गया और जाँचें अच्छी आने लगी और ३ सप्ताह होते-होते तो सभी समस्याओं में ६० % से ज्यादा आराम मिल गया और डायलेसिस की तो जरूरत ही नहीं पड़ी और अंग्रेजी दवायें सारी बन्द करवाकर सिर्फ आयुर्वेदिक दवायें चलीं और पंचकर्म थैरेपी दी गयी। १८.०९.२०२० की जाँच में क्रिटनीन ४.७, यूरिया ८७.१, सोडियम १३३.५, पोटेशियम ५.८, हीमोग्लोबिन ६.६ आया।

            मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे भाई को डायलेसिस करवाने से छुटकारा मिल गया और खून चढ़वाने की जरूरत नहीं पड़ी। अब मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरे भइया अगर ऐसा ही परहेज व नसे की लत से दूर रहेंगे तो बहुत जल्द पूर्ण स्वस्थ हो जायेंगे। मैं डॉक्टर साहब व पूरे स्टॉफ को बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने डायलेसिस व अंग्रेजी दवाओं से मेरे भइया को बचा लिया और नशे की लत भी छूट गयी।

 

लल्लन सिंह, बड़े भाई इन्द्रभान सिंह

छौसट (कचूट), रीवा (म.प्र.)


डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                  एम.डी.(आयु.) आ. 

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