जब उन्हें डायलेसिस के लिए कह दिया गया : लोग कहते थे पागल !! (रिपोर्ट्स और विडियो देखें)

 

क्या ये सही नहीं है !!
किडनी और हृदय रोगों की चिकित्सा आयुष में बहुत ही उत्कृष्ट है, ऐसे रोगी जिनकी अंग्रेजी दवा खाते - खाते शरीर की जीवनीय शक्ति और व्याधिक्षमत्व शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो जाती है ऐसे रोगियों को आयुष चिकित्सा बहुत ही परिणामोत्पादक, प्रभावशाली और जीवनदायिनी है, किन्तु लोगों में जागरूकता का आभाव है जन - जन को इसका प्रचार करना चाहिए। आज अंग्रेजी इलाज की स्थिति यह है कि पहले एक गोली से इलाज शुरू होता है धीरे-धीरे वह हार्टकिडनीलिवर का रोगी बन जाता है और फिरकभी भी बन्द न होने वाली दवाओं का सिलसिला चलने लगता है। जबकि आयुष चिकित्सा में दवायें धीरे-धीरे घटते-घटते बिल्कुल बन्द हो जाती हैं। ऐसे में आप सभी का पावन कर्तव्य बनता है कि पीड़ित मानव का सही मार्गदर्शन करें और उन तक जानकारी पहुँचायें, ताकि ऐसे पीड़ित मानव का कल्याण हो सके और लोग अंग्रेजी दवाओं के जाल से बच सकें 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)


                मेरा नाम जितेन्द्र है, मेरे जीजा जी श्री रेवतीरमण शुक्ला (उम्र ४७ वर्ष) यह खुजरिहा खुर्द, चित्रकूट के रहने वाले हैं, यह एक किसान हैं। मेरे जीजा जी को डेढ़ साल पहले सुगर की समस्या हो गयी थी, तभी से अंग्रेजी दवा लेने लगे थे। फिर १ साल पहले बायें पैर के तलवे में घाव हो जाने के कारण प्रयागराज में दिखाया गया, वहाँ पर ऑपरेशन किया गया, अंग्रेजी दवायें चलीं। फिर घर वापस आ गये।

            फिर ३ माह पहले एक दिन अचानक पूरे शरीर में सूजन आ गयी, कुछ भी खाने पर उल्टियाँ हाने लगीं, पेशाब में समस्या हो गयी तो हम लोग तुरन्त प्रयागराज के एक नर्सिंग होम में दिखाया, वहाँ पर सारी जाँचें करवाई गयीं और किडनी की समस्या बताई गयी, डायलेसिस के लिए भी बोल दिया गया। ३-४ दिन भर्ती रखकर अंग्रेजी दवायें व इंजेक्शन दिये गये और २ यूनिट खून भी चढ़वाया गया। हमने डायलेसिस नहीं करवायी और कुछ दिनों की दवायें लेकर घर ले आये।




            मेरे जीजा जी शराब बहुत पीते थे और उसी के कारण पेट साफ न होना ये सब समस्यायें होने लगीं। घर पर दवायें खाने लगे तो याददाश्त कम होती जा रही थी, घर के लोग पागल कहने लगे और जैसे-जैसे अंग्रेजी दवायें खाते रहे वैसे ही और ज्यादा हालत खराब होने लगी, उल्टियाँ बिल्कुल रुक नहीं रहीं थीं, पेशाब अच्छे से नहीं हो रही थी, पेट साफ नहीं होने लगा, भूख बिल्कुल नहीं लगने लगी।

            तभी मेरे जीजा जी को गाँव के ही लोगों के द्वारा आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला। मैं अपने जीजा जी को लेकर आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट दूसरे दिन लेकर पहुँचा, मैंने रजिस्ट्रेशन करवाया, फिर नम्बर आने पर ओपीडी-२ में डॉक्टर वाजपेयी जी के पास बुलाया गया, उन्होंने सारी जाँचें देखीं और कुछ जाँचें करवायीं, जाँच आने के बाद उन्होंने कहा कि स्टेज तो डायलेसिस की है लेकिन कोशिश करता हूँ कि डायलेसिस न करवानी पड़े, इसके लिए पूरा परहेज व समय से दवायें खानी पड़ेंगी और शराब तो बिल्कुल देखनी भी नहीं और १५ दिन भर्ती रहकर पंचकर्म थैरेपी करवाने की सलाह दी।



            मैंने १५ दिन के लिए भर्ती करवा लिया और १५ दिन पंचकर्म थैरेपी करवाई गयी, १५ दिनों में मेरे जीजा जी को पूर्ण रूप से शारीरिक स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, रिपोर्ट्स भी हफ्ते कम हो रही है, मैं बहुत खुश हो गया और मैंने जो डायलेसिस न करवाने को कह रहा था वैसा ही हुआ, मेरे जीजा जी डायलेसिस से बच गये, १५ दिनों के पंचकर्म थैरेपी व दवाओं से उन्हें पूर्ण आराम मिल गया।

            जो अंग्रेजी डॉक्टर सिर्फ डायलेसिस करवाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बता पा रहे थे, वहीं आयुर्वेदिक दवाओं से न तो खून चढ़वाने की जरूरत पड़ी न ही कोई अंग्रेजी दवाओं की। उन्हें भूख भी बहुत अच्छी लगने लगी, पेशाब भी सही हो गयी, उल्टियाँ तो दूसरे दिन से ही बन्द हो गयीं थीं।

            मैं बहुत खुश हूँ कि मेरे जीजा जी को डायलेसिस से बचा दिया और अंग्रेजी दवायें भी सारी बन्द हो गयीं। इन १५ दिनों में १०० % पूरा आराम लग रहा है। मैं डॉक्टर वाजपेयी जी को धन्यवाद देता हूँ और अब मुझे पूर्ण विश्वास है कि अब डायलेसिस व खून चड़वाने और अंग्रेजी दवाओं की कभी जरूरत नहीं पड़ेगी।

जितेन्द्र मेरे जीजा जी श्री रेवतीरमण शुक्ला

खुजरिहा खुर्द, चित्रकूट ९५१११९३७१८

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य

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