स्टेंट डलवाने से बचा लिया आयुष ग्राम चित्रकूट ने!!



                मेरा नाम जर्नादन सिंह, उम्र ६० साल, मैं चौखड़ पूरे केशव राय, प्रतापगढ़ का रहने वाला हूँ। मैं जब इण्टर मीडिएट में पढ़ता था तब मुझे हल्की दमा की समस्या थी, मैं ऐसे ही दवा ले आता था, ज्यादा मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।
            मुझे सितम्बर २०१९ से पैदल चलने में समस्या होने लगी, थकान सी रहती, साइकिल चलाने में बीच-बीच में रुक कर खड़ा होना पड़ता था, सीढ़ियाँ चढ़ने में श्वास फूलने लगती थी, सीने में दर्द होता लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और मैं समझता भी नहीं था कि मुझे हार्ट की समस्या हो सकती है।
            दिसम्बर २०१९ में मुझे समस्या ज्यादा होने लगी, एक दिन तो अचानक बहुत ज्यादा श्वास फूलने लगी, ऐसा लगा कि अब साँस ही नहीं लौटेगी। मेरे परिवार वाले घबराकर मुझे प्रतापगढ़ के एक हॉस्पिटल ले गये, वहाँ पर डॉक्टर ने ईसीजी करवाई और कहा कि आप इको और एंजियोग्राफी भी करवा लीजिए, प्रतापगढ़ के डॉक्टर ने १ हफ्ते की अंग्रेजी दवायें दीं, मैंने १ हफ्ते की दवायें खायीं पर मुझे कुछ भी आराम नहीं हुआ।
            अब मैं लखनऊ केजीएमसी चला गया वहाँ में डॉक्टर द्विवेदी जी को दिखाया, उन्होंने ईसीजी देखी और कहा कि आप इको करवा लीजिए मैंने इको करवायी, इको जाँच देखने के बाद उन्होंने बताया कि मुझे हल्का अटैक भी आ चुका है, मैंने कहा मैंने कभी ध्यान ही नहीं दिया। डॉक्टर द्विवेदी जी ने १५ दिन की दवायें दीं पर बिल्कुल भी आराम नहीं मिला, अब मैं अपोलो चला गया, वहाँ पर डॉक्टर अजय बहादुर सिंह जी ने ईसीजी व इको देखी तो कहा कि आप १ माह की दवायें खाइये फिर अगर जरूरत होगी तो हम एंजियोग्राफी करवायेंगे और फिर उसी हिसाब से एंजियोग्राफी/स्टेंट डलवाना पड़ सकता है क्योंकि ब्लॉकेज होने की सम्भावना है और कभी भी अटैक आ सकता है। मैं कुछ दिनों की दवायें लेकर घर आ गया।
            तभी मुझे मेरी बेटी जो अपने बेटे का इलाज आयुष ग्राम चित्रकूट में करवा चुकी है के द्वारा आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला कि यहाँ हार्ट की बहुत अच्छी चिकित्सा है।
            मैं १५.०२.२०१९ को आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट पहुँचा, रजिस्ट्रेशन करवाया और फिर मेरा नम्बर आने पर मुझे डॉ. वाजपेयी जी के पास ओपीडी-२ में बुलाया गया। उन्होंने मेरी सारी जाँचें देखीं और कुछ जाँचें करवायीं, जाँच में मेरा कोलेस्ट्राल भी बढ़ा आया। उन्होंने मुझे समझाया और कहा कि न तो आपको स्टेंट डलवाना होगा, न बाईपास सर्जरी। केवल चिकित्सा से ही आपका हार्ट स्वस्थ हो जायेगा और हम आपको १०१ % स्वस्थ कर लेंगे, आप नियमित ११-१२ माह तक चिकित्सा करें। दवायें खाइये। मुझे पहले माह की चिकित्सा से ही ५० % के लगभग आराम मिल गया। मैं आयुष कार्डियोलॉजी के रिजल्ट देखकर हैरान रह गया।
            आज मुझे ५ माह हो गये इस समय मैं लगभग पूरा ठीक हूँ, मुझे चलने में कोई समस्या नहीं होती है, श्वास बिल्कुल नहीं फूलती, साइकिल से सारा काम कर लेता हूँ, पहले तो अंग्रेजी दवायें लेने के बाद भी १० सीढ़ियाँ चढ़ना मुश्किल था आज मैं २०० सीढ़ियाँ चढ़ लेता हूँ और मुझे कुछ दिक्कत नहीं होती है और जो मुझे हमेशा डर बना रहता था कि अटैक न आ जाये मेरा डर बिल्कुल मिट गया, मेरा आत्म विश्वास बढ़ गया कि मुझे अब अटैक तो आ ही नहीं सकता।
            मैं कहता हूँ कि हार्ट की चिकित्सा जितनी अच्छी आयुष में है उतनी अंग्रेजी पैथी में तो नहीं पाया। इसका लाभ सभी को उठाना चाहिए और हार्ट के स्टेंट, बाईपास सर्जरी से बचना चाहिए।
जनहित में प्रकाशित कर रहा हूँ।
- जर्नादन सिंह, चौखड़ पूरे केशव राय, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) ९४५०६९०८०६

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