मेरी बेटी को नया जीवन मिला : आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट के डॉक्टर सफल हुये!!


आयुष के ऐसे हैं प्रभाव!!
आयुर्वेद उपचार से लाखों बच्चों को बचाया जा सकता है इन्हेलर और दमा से आयुर्वेद का मतलब महान् समृद्धवैज्ञानिक और समूल रोगहारी चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान का आश्रय है।  ‘‘आज भारत के १० प्रतिशत शहरी बच्चे और किशोर दमा से ग्रस्त हैं और अंग्रेजी डॉक्टरों के पास कोई इसका समाधान नहीं। इन बच्चों और किशोरों की रोगप्रतिरोधक क्षमता घट रही है बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पा रहाफेंफड़े कमजोर हो रहे हैं।’’ किन्तु भारत का दुर्भाग्य है कि मानव आयुर्वेद का लाभ नहीं उठा पा रहा। पर अब समय आ गया है कि मानवता की सेवा हेतु सभी आगे आयें आयुर्वेद की ओर सभी को प्रेरित करें। इस प्रकार दमाश्वासइन्हेलर के चंगुल में फँसे प्रतिवर्ष हजारों बच्चों और किशोर-किशोरियों को ‘आयुष ग्राम’ चित्रकूट मुक्त कर पा रहा है।

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)
श्रीमती सरोज और उनकी बेटी नन्दनी 
           मेरी बेटी नन्दनी, उम्र १८ साल को जनवरी २०१९ में एक दिन शादी में जाने के बाद उसी रात को अचानक पेट में असहनीय दर्द होने लगा और लूजमोशन होने लगे। मैं तुरन्त वहाँ से घर ले आयी, घर में धीरे-धीरे पूरे शरीर में सूजन आ गयी। मैं तुरन्त दूसरे दिन जानकी कुण्ड चित्रकूट लेकर गयी। वहाँ पर सभी जाँचें हुयीं, जाँच आने के बाद डॉक्टरों ने बताया कि लिवर में इंफेक्शन है। जानकीकुण्ड से १ माह तक इलाज चला, मेरी बेटी को कोई आराम नहीं मिला और खून कम होता चला जा रहा था, पेट में पानी भर गया, चलने में समस्या होने लगी, श्वास फूलती थी, एक भी कदम बिना सहारे के नहीं चल पा रही थी और तभी से थायरॉयड की समस्या थी।
            फिर हम लोग अपनी बेटी को सतना के त्रिमूर्ति हॉस्पिटल लेकर गये। वहाँ पर भी सभी जाँचें हुयीं और जाँच के बाद लीवर व किडनी दोनों में समस्या बतायी गयी, वहाँ पर १५ दिन भर्ती रखा गया और ६ यूनिट खून चढ़वाया गया और पेट से पानी निकलवाया गया और पेशाब नहीं हो रही थी तो पेशाब की नली भी डाल दी गयी लेकिन कोई आराम न मिलने पर मेरी बेटी को नागपुर के लतामंगेश्वर हॉस्पिटल रिफर कर दिया गया, वहाँ पर भी १५ दिन तक इलाज चला, इंजेक्शन व अंग्रेजी दवायें चलीं, वहाँ पर मेरी बेटी की और ज्यादा हालत खराब होने लगी, तो वहाँ से भी रिफर कर दिया गया, मेरे पास इतना पैसा न होने के कारण मैं घर ले आयी और चित्रकूट के डॉ. ऋषि वर्मा सरकारी हॉस्पिटल के पास लेकर गयी, उन्होंने कुछ अंग्रेजी दवायें तो दीं लेकिन उन्होंने ही बताया कि आप लोग पुरवा तरौंहा के आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट लेकर जाओ वहीं पर कुछ हो सकता है हम लोग कुछ नहीं कर पायेंगे।
            डॉ. ऋषि वर्मा जी के कहने पर हम लोग अपनी बेटी को लेकर आयुष ग्राम चिकित्सालय, चित्रकूट पहुँची, वहाँ पर मेरा नम्बर लगवाया गया फिर नम्बर आने पर मुझे ओपीडी नं.-५ में डॉ. अर्चना वाजपेयी, एम.डी. आयु. (कायचिकित्सा) के पास बुलाया गया। उन्होंने सारी रिपोर्ट्स देखीं और कहा कि आप इतने जगह से रिफर करवाकर लेकर आये मैं कोशिश करती हूँ और जैसा मैं कहूँगी वैसा ही करना पड़ेगा। मैंने उनकी बात मान ली और कुछ जाँचें करवायीं। मेरी बेटी को १ माह की दवायें दीं और कहा कि मेरी बेटी को कुछ खाने-पीने के लिए मत देना सिर्फ  गाय का दूध या बकरी का दूध लेना है बस। मैंने ऐसा ही किया, अपनी बेटी को सिर्फ बकरी का दूध दिया और समय से दवायें दीं, मेरी बेटी को पहले माह से आराम मिलने लगा। अगले माह मैंने फिर मैम को दिखाया तो उन्होंने फिर से दूध ही देने को कहा, दवायीं दीं और जो अंग्रेजी दवायें चल रही थीं उन्हें भी बन्द करा दिया।
            अब मेरी बेटी का इलाज चलते १० माह हो गये हैं अब मेरी बेटी को ९९ % स्वस्थ है। जब मेरी बेटी यहाँ आयी थी तब उसे ४ लोग उठाकर लेकर आये थे, श्वास बहुत फूलती थी, कुछ खा-पी नहीं पा रही थी, कमजोरी बहुत हो गयी, खून बहुत कम हो गया था, प्यास बहुत लगती थी, पूरे शरीर में दर्द रहता था, पूरे शरीर में सूजन थी।
            लेकिन धीरे-धीरे १० माह की आयुर्वेदिक दवाओं से ही मेरी बेटी बिल्कुल स्वस्थ हो गयी। अब तो खूब खेलती-कूदती है, घर का काम भी करवाने लगी है, अब वजन भी अच्छा हो गया, अब खूब खा-पी भी लेती है। अब जब से यहाँ से इलाज चला तब से न तो पानी निकलवाने की जरूरत पड़ी न तो खून चढ़वाने की और न ही अंग्रेजी दवाओं, इंजेक्शनों और बोतलों से छुटकारा मिल गया। मेरी बेटी जो बिल्कुल मरणासन्न में लाई गयी थी उसे आज जीवनदान मिल गया। मैं बहुत खुश हूँ और मैम की बहुत आभारी हूँ।

श्रीमती सरोज
भरतपुर (कर्वी) चित्रकूट (उ.प्र.)



डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुशरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

सरकार आयुष को बढ़ाये मानव का जीवन बचाये!!
     सरकार को फिर से भारत में अंग्रेजी अस्पताल और अंग्रेजी मेडिकल कॉलेजों की जगह अच्छे और समृद्ध आयुष संस्थान खोलने चाहिए तथा उनसे पूरी क्षमता से कार्य लेना चाहिए। इससे भारत का मानव हार्ट के ऑपरेशनछेड़छाड़ स्टेंट और डायलिसिस जैसी स्थितियों से बचकर और हार्ट को स्वस्थ रख सकेगा। क्योंकि हार्ट के रोगी पहले भी होते थे आज भी होते हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिनका सर्वोच्च समाधान आयुष में है। आयुष ग्राम चित्रकूट एक ऐसा आयुष संस्थान है जहाँ ऐसे-ऐसे रस-रसायनों/ औषध कल्पों का निर्माण और संयोजन करके रखा गया है जो जीवनदान देते हैं। पंचकर्म की व्यवस्था एम.डी. डॉक्टरों के निर्देशन में हो रही हैपेयाविलेपीयवागू आदि आहार कल्पों की भी पूरी उपलब्धता है इसलिये यहाँ के ऐसे चमत्कारिक परिणाम आते हैं।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 


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