लगातार अंग्रेजी दवाओं से बेटे की किडनी हुयी फेल : ठीक हुयी आयुष ग्राम चित्रकूटधाम से !!


 यह वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हो चुका है कि रोगों की उत्पत्ति वात, पित्त, कफ के असंतुलन से ही होती है


कोलेस्ट्रोल,मधुमेह,ब्लडप्रेशर,थायराइड,हड्डियों की बीमारी और डिजेनरेशन आदि चयापचय असंतुलन की बीमारी है रीढ़ की नस दबना, घुटनों का घिसना और हार्ट में ब्लॉकेज यह ठीक उसी प्रकार त्रिदोषों के असंतुलन का परिणाम और आयुजन्य विकृति है कोलेस्ट्रोल का घटना बढ़ना मौसम के बदलाव से भी जुड़ा प्रकरण है किन्तु वर्तमान में ऐसा परिद्रश्य निर्मित है कि व्यक्ति रोगों के सही कारण ठीक करने की अपेक्षा प्रदर्शन में बहुत व्यस्त है


 प्रदर्शन में वह बहुत बड़े बड़े अंग्रेजी अस्पतालों के चक्कर काटता है और अप्राकृतिक दवाइयां खाता है, बड़ी बड़ी जांचें कराता है और ऐसा करते करते रोग को जटिल कर लेता है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर लेता है, नये नये रोग पैदा कर लेता है जैसे हार्ट कोलेस्ट्रोल के प्रकरण को ले लीजिये इनकी गोलियां खाते खाते लोग नपुंसकता,कान्तिहीनता और दुर्बलता में जकड जाते हैं जबकि आयुष चिकित्सा में ऐसे रोगों का सहज, सरल समाधान मिल ही जाता है इसलिए आयुष चिकित्सा अपनाकर ढेर सारी गोलियों और रोगों के जंजाल से बाहर निकलें |


Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)
चि. अश्विन शर्मा साथ में उसके पिता 


            मेरा बेटा अश्विन शर्मा, उम्र १३ साल को जन्म के २ साल बाद से मुँह से झाग आने लगता था, जल्दी-जल्दी सर्दी-जुकाम हो जाता था, कफ बहुत बनता था, श्वास बहुत फूलने लगती थी, उल्टी हो जाती थी, जब उल्टी हो जाती थी तब सर्दियों में कुछ आराम मिल जाता था और कभी-कभी बुखार भी आ जाता था।
            इन सब समस्याओं के कारण मैंने वहीं उदयपुरा के अंग्रेजी अस्पताल के डॉ. मालनी जी को दिखाता रहा, उनका इलाज १ साल तक चला अंग्रेजी दवायें व इंजेक्शन लगते थे। जब इंजेक्शन लगते थे तब श्वास बहुत उखड़ने लगती थी, श्वास लेने में बहुत तकलीफ होने लगती थी। जब तकलीफ होती थी तो इंजेक्शन बन्द करके सिर्फ अंग्रेजी दवायें चलती रहती थीं, ऐसा क्रम १ वर्ष तक इलाज चलता रहा, लेकिन कुछ ज्यादा आराम न मिलने पर मैंने  अपनी बहन के बताने पर मैं अश्विनी बेटे को भोपाल के डॉ. मनोज जैन को दिखाया, जो चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं, उनके यहाँ मैंने अपने बेटे का २ साल तक इलाज करवाया। वहाँ भी अंग्रेजी दवायें चलती रहीं। कुछ समय बाद फिर से समस्यायें होने लगीं, तो मैं अपने बेटे को उदयपुरा के ही डॉ.एम.एल. बड़कोल को दिखाया। डॉ. बड़कोल जी ने देखा, उन्होंने जाँच करायी और कहा कि आपके बेटे को किडनी की समस्या है इसके लिए आप किसी और अच्छे डॉक्टर को दिखायें। मैं बहुत परेशान हो गया और मैं बेटे को लेकर नागपुर ले गया। वहाँ पर डॉ. धनञ्जय ओकालकर जी को दिखाया। उन्होंने सारी खून की जाँचें करवायीं और जाँच आने के बाद बताया कि पेशाब से प्रोटीन डिस्चार्ज हो रहा है और यूरिया, क्रिटनीन बढ़ा हुआ है। मैंने अपने बेटे का ६ माह तक इलाज करवाया। लेकिन दवा बन्द होने के बाद फिर से जाँच करवायी तो यूरिया, क्रिटनीन बढ़ने लगा और पेशाब में प्रोटीन आने लगा। मैंने नागपुर से २ साल तक इलाज करवाया और उन्होंने बायोप्सी की सलाह दी। उसके बाद मैंने इन्दौर के सरकारी अस्पताल में किडनी की समस्या के लिए एक डॉक्टर को दिखाया, वहाँ का ६ माह इलाज चला लगभग डेढ़ साल तक ठीक रहा।
            डेढ़ साल बाद पुन: सर्दी-जुकाम और शरीर में हल्की सूजन आने लगी, तो मैं अपने बेटे को नरसिंहपुर के डॉ.रविन्द्र पाण्डेय जी को दिखाया। उन्होंने आयुर्वेदिक इलाज किया। मेरे बेटे को उनके १५ दिन के इलाज से सूजन खत्म हो गयी, लेकिन दवायें तो चलती रहीं पर २ माह बाद फिर से सूजन आ गयी, मैंने २-३ माह तक इलाज करवाया पर सूजन में कोई आराम नहीं मिल पा रहा था, सूजन धीरे-धीरे बढ़ती ही जा रही थी।
            फिर मुझे मेरे मामा जी श्री केशर त्रिपाठी जी के द्वारा आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में पता चला। लेकिन उस समय मेरे बेटे की बहुत तबियत खराब थी, इसलिए मैंने अपने बेटे को भोपाल के डॉ. मनीष जैने को दिखाने आना पड़ा, उस समय मेरा बेटा ऑक्सीजन के सहारे भोपाल ले जाया गया था। उसके पेट में लाल चकत्ते और श्वास बहुत फूल रही थी। उन्होंने १५ दिन तक अपने अस्पताल में भर्ती रखा। डॉ. मनीष जैन के इलाज से शरीर और पेट की सूजन तो खत्म हो गयी लेकिन अण्डकोष में बहुत सूजन आ गयी तो वहीं उनके अस्पताल में एक दिन डॉ. संजय गुप्ता जी आये तो डॉ. मनीष जैने ने उन्हें दिखाने को बोले, तो डॉ. संजय गुप्ता जी अपने अस्पताल में भर्ती करने को बोले।
            परन्तु मैं वहाँ नहीं ले जा पाया और मैं अपने बेटे को लेकर आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट लेकर पहुँचा, वहाँ पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया और फिर मेरा नम्बर आने पर डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (आयु. कायचिकित्सा) की ओपीडी नम्बर-५ में बुलाया गया। मैं अपने बेटे को लेकर ओपीडी-५ पर पहुँचा। वहाँ पर पूरी केस हिस्ट्री ली गयी और कुछ खून की जाँचें करवायी गयीं फिर जाँच आने के बाद उन्होंने सारी रिपोर्ट्स देखीं और १५ दिन तक रखने की सलाह दी। लेकिन उस समय मैं १ माह की दवायें लेकर घर आ गया। घर पर १ माह दवा खाने के बाद मेरे बेटे को स्टेरॉयड ७० मि.ग्रा. की थी वो १ माह की आयुर्वेदिक दवाओं के बाद ४० मि.ग्रा. कर दी गयी।
            मैं अगले माह फिर से आयुष ग्राम चित्रकूट पहुँचा, मैंने मैम को सारी बातें बतायी तो उन्होंने स्टेरॉयड की डोज ४० से १० मि.ग्रा. धीरे-धीरे करा दी और १० दिन के लिए भर्ती कर दिया। मैंने १० दिन अपने बेटे को भर्ती रखकर पंचकर्म थैरापी व आयुर्वेदिक दवायें चलायीं। अब स्टेरॉयड १ दिन छोड़कर या २ दिन छोड़कर चल रही हैं वह भी ५ मि.ग्रा. अब मेरे बेटे को पूर्णत: आराम है।
            अब अश्विनी को सर्दी-जुकाम में पूरा आराम है, सूजन बिल्कुल नहीं है, श्वास में भी पूरा आराम है। अब उल्टी भी नहीं होती है।
            मेरे बेटे को इतनी जल्दी आराम हो जायेगा मुझे विश्वास नहीं हो रहा। अब मुझे समझ में आया आयुष चिकित्सा की ताकत। सुयोग्य चिकित्सक व अस्पताल से व्यक्ति को जीवनदान दिया जा सकता है।


            आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट का आयुष ग्राम चिकित्सालय बहुत बड़ा आयुर्वेद संस्थान है, यहाँ पैरा मेडिकल डिप्लोमा होल्डर ही रखे जाते हैं। थैरापी की भव्य व्यवस्था, दवाओं का विशाल भण्डार। बच्चों के रोगों की विशेष चिकित्सा। ऐसे-ऐसे बच्चों की यहाँ चिकित्सा की जा रही है जो हर माह अंग्रेजी हास्पिटल में दाखिल होते हैं, दौरे आते हैं उनकी दवायें छूटती हैं, बार-बार न्यूमोनिया से छुटकारा मिलते मैंने यहाँ देखा। यदि कोई भी बच्चों की बीमारी से परेशान हो तो वहाँ तक मेरी बात अवश्य पहुँचाने का कष्ट करें।

उमेश शर्मा
उदयपुरा (रायसेन), म.प्र.


डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 


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