एलोपैथ से हारे २ बार की थैरापी और दवाओं से सोरायसिस गया आयुष ग्राम चित्रकूट से !!


ध्यातव्य- 
सोरायसिस जैसे चर्म रोगों का जड़ से इलाज केवल आयुष पद्धति में है, पूरे शरीर में फैले सोरायसिस को मिटाने का सामर्थ्य सिर्फ आयुष चिकित्सा में ही है सोरायसिस अंग्रेजी चिकित्सा के लिए अभी - भी चुनौती माना जाता है, लेकिन इसका सम्यक समाधान आयुष चिकित्सा लिए हुए है, इस केस में श्रीमती सरोज कुमारी जी को सोरायसिस से दो बार की पंचकर्म थेरापी से आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट ने मुक्त किया। आप सभी का पावन कर्तव्य बनता है कि इस बात को जन-जन में प्रसारित करें, ताकि आप सभी के सहयोग से देश के सभी सोरायसिस रोगियों को बचाया जा सके 

डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
संस्थाध्यक्षआयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूटधाम (उ.प्र.) २१०२०५
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)
श्रीमती सरोज कुमारी 

           
मुझे लगभग १० साल पहले सिर में छोटे-छोटे दाने हो जाते थे और खुजली भी बहुत होने लगी थी, लेकिन मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। फिर वही दाने पपड़ी बनने लगे और पूरे सिर में धीरे-धीरे हो गया, लेकिन फिर भी उन दानों पर ध्यान नहीं दिया और काम करती रही। फिर सिर के अलावा धीरे-धीरे पूरे शरीर में दाने निकलने लगे, उन दानों में बहुत खुजली होती और खुजलाने के बाद उन दानों में पानी भर जाता और कभी-कभी दानों से खून भी निकलने लगता। जब समस्या बढ़ने लगी तब मैं घाटमपुर के एक अंग्रेजी डॉक्टर को दिखाया। मैंने वहाँ अंग्रेजी इलाज ९ माह तक कराया। पर कुछ आराम नहीं मिला, मेरी समस्या कम होने के बजाय और अधिक बढ़ने लगी। अंग्रेजी दवायें लम्बे समय तक खाने से रोग बिगड़ गया।
          फिर घाटमपुर का इलाज बन्द कराकर मेरे पति मुझे पीजीआई लखनऊ ले गये, लखनऊ के डॉक्टर ने कुछ अंग्रेजी दवायें दीं, मैंने ५ माह वहाँ की दवायें भी खायीं पर कुछ आराम नहीं हुआ, तो मैंने डॉक्टर साहब से पूछा कि दवायें खाने के बाद भी क्यों आराम नहीं मिल रहा, तो डॉक्टर साहब ने संतोषजनक उत्तर नहीं दिया, दवायें खाते-खाते मेरे शरीर में सूजन आने लगी। मैं बहुत परेशान थी, तभी मैं कानपुर के हैलेट हॉस्पिटल गयी, हैलेट के डॉक्टर एस.के. अरोड़ा जी को दिखाया, उन्होंने भी बताया कि मुझे एलर्जी की समस्या है। मेरा कानपुर के डॉ.एस.के. अरोड़ा जी का १ वर्ष इलाज चला, लेकिन दाने कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे थे और अंग्रेजी दवायें खा-खाकर सूजन भी बढ़ने लगी। मैंने सोच लिया कि ये अंग्रेजी दवायें बर्बाद कर देंगी, अब मुझे एक आयुर्वेदिक डॉक्टर को दिखाया जिससे कुछ आराम तो मिल गया। मुझे ३ साल तक कुछ भी नहीं हुआ, ३ साल बाद मेरे पूरे शरीर में पुन: दानें निकल आये, खुजली होने लगी, मैं फिर से वहीं पहुँची, तो उन्होंने साफ मना कर दिया और कहा अब इसका इलाज मेरे पास नहीं आप लोग कहीं और दूसरी जगह दिखा लीजिए।
 मैं बहुत परेशान हो गयी, फिर मुझे कन्नौज के एक डॉक्टर के पास ले जाया गया वह भी आयुर्वेदिक इलाज करते हैं, मैंने १ साल उनकी दवायें खायीं, आराम मिलने लगा, लेकिन फिर से कुछ दिन बाद पुन: दानें निकलने लगे, उन्होंने भी कह दिया कि अब मेरे पास इसका इलाज नहीं है। उन्हीं ने ही आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में बताया। मैं दूसरे दिन ही अपने पति के साथ चित्रकूट पहुँची, वहाँ पर मेरा रजिस्ट्रेशन हुआ फिर मेरा नम्बर आने पर मुझे ओपीडी में बुलाया गया। उन्होंने मुझे देखा और समस्यायें पूछीं। उन्होंने मुझे वमन, विरेचन, बस्ति आदि की सलाह दी। आयुष ग्राम चित्रकूट में भर्ती हो गयी वहाँ मेरी २ सप्ताह तक अलग-अलग पंचकर्म थैरेपी चली और साथ-साथ दवायें व खान-पान का नियम भी। इससे आराम मिलने लगा, दानें भी कम होने लगे, पपड़ी बनना बन्द हो गयी। मेरे २ सप्ताह पूरे होने के बाद १ माह की दवायें लिखकर डिस्चार्ज कर दिया और १ माह बाद पुन: फिर से दिखाने को बोले।
            मैं दवायें लेकर घर आ गयी और घर पर समय से दवायें खायीं और पूरा परहेज किया। मुझे आराम मिलने लगा। मैं १ माह बाद फिर से आयुष ग्राम ट्रस्ट, सूरजकुण्ड रोड, चित्रकूट में दिखाने गयी। जब १ माह बाद मैं फिर से दिखाने आई तो सर ने फिर से अगले चरण के पंचकर्म हेतु १५ दिन भर्ती होने के लिए बोले। मैं फिर से भर्ती हो गयी। दूसरे बार के २ हफ्तों में तो मुझे ऐसा लगने लगा कि मेरा रोग पूरी तरह से गायब ही हो गया है। सर ने मुझसे कहा कि आपको और कुछ दिन की दवा खानी पड़ेगी और परहेज भी करना पड़ेगा। आज मुझे १० माह हो गये हैं और मैं अब बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे ६-७ माह से बिल्कुल दानें नहीं निकले और भी जो पेट साफ न होने की समस्यायें थीं वह भी सब ठीक हो गयी।
            मैं और मेरा पूरा परिवार जो १० वर्ष से अंग्रेजी दवायें करवा-करवाकर परेशान था वहीं मैं आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट में आकर ठीक हुयी।

 मैं सभी को बताना चाहती हूँ कि सोरायसिस जैसे चर्म रोगों का जड़ से इलाज केवल आयुष पद्धति में है, अंग्रेजी दवा में तो केवल दबाता है और फिर उभरता है।

सरोज कुमारी
सोनपुरा (जनखट), जिला- कन्नौज (उ.प्र.)



डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।

डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।


सरकार आयुष को बढ़ाये मानव का जीवन बचाये!!
     सरकार को फिर से भारत में अंग्रेजी अस्पताल और अंग्रेजी मेडिकल कॉलेजों की जगह अच्छे और समृद्ध आयुष संस्थान खोलने चाहिए तथा उनसे पूरी क्षमता से कार्य लेना चाहिए। इससे भारत का मानव हार्ट के ऑपरेशनछेड़छाड़ स्टेंट और डायलिसिस जैसी स्थितियों से बचकर और हार्ट को स्वस्थ रख सकेगा। क्योंकि हार्ट के रोगी पहले भी होते थे आज भी होते हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिनका सर्वोच्च समाधान आयुष में है। आयुष ग्राम चित्रकूट एक ऐसा आयुष संस्थान है जहाँ ऐसे-ऐसे रस-रसायनों/ औषध कल्पों का निर्माण और संयोजन करके रखा गया है जो जीवनदान देते हैं। पंचकर्म की व्यवस्था एम.डी. डॉक्टरों के निर्देशन में हो रही हैपेयाविलेपीयवागू आदि आहार कल्पों की भी पूरी उपलब्धता है इसलिये यहाँ के ऐसे चमत्कारिक परिणाम आते हैं।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 



Post a Comment

0 Comments