(लगातार किडनी फेल्योर में सफलता) मेरी पत्नी डायलेसिस से बच गयी : यदुवीर सिंह (रिटायर्ड पुलिस)!!


 यह वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित हो चुका है कि रोगों की उत्पत्ति वात, पित्त, कफ के असंतुलन से ही होती है


कोलेस्ट्रोल,मधुमेह,ब्लडप्रेशर,थायराइड,हड्डियों की बीमारी और डिजेनरेशन आदि चयापचय असंतुलन की बीमारी है रीढ़ की नस दबना, घुटनों का घिसना और हार्ट में ब्लॉकेज यह ठीक उसी प्रकार त्रिदोषों के असंतुलन का परिणाम और आयुजन्य विकृति है कोलेस्ट्रोल का घटना बढ़ना मौसम के बदलाव से भी जुड़ा प्रकरण है किन्तु वर्तमान में ऐसा परिद्रश्य निर्मित है कि व्यक्ति रोगों के सही कारण ठीक करने की अपेक्षा प्रदर्शन में बहुत व्यस्त है


 प्रदर्शन में वह बहुत बड़े बड़े अंग्रेजी अस्पतालों के चक्कर काटता है और अप्राकृतिक दवाइयां खाता है, बड़ी बड़ी जांचें कराता है और ऐसा करते करते रोग को जटिल कर लेता है अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर लेता है, नये नये रोग पैदा कर लेता है जैसे हार्ट कोलेस्ट्रोल के प्रकरण को ले लीजिये इनकी गोलियां खाते खाते लोग नपुंसकता,कान्तिहीनता और दुर्बलता में जकड जाते हैं जबकि आयुष चिकित्सा में ऐसे रोगों का सहज, सरल समाधान मिल ही जाता है इसलिए आयुष चिकित्सा अपनाकर ढेर सारी गोलियों और रोगों के जंजाल से बाहर निकलें 
Evidence based treatment (वैज्ञानिक प्रमाण युक्त चिकित्सा)
श्रीमती हरुली देवी साथ में उनके पति यदुवीर सिंह (रिटायर्ड पुलिस)


                मेरी पत्नी को १५ साल से मधुमेह व उच्च रक्तचाप की समस्या थी। पिछले ९ साल से मधुमेह व ब्लडप्रेशर की अंग्रेजी दवायें चलने लगीं।
            २ माह पहले एक दिन अचानक सुगर लो हो गया व बीपी हाई हो गया, मैं देहरादून के चारधाम हॉस्पिटल में ले गया। उस समय मेरी पत्नी बिल्कुल भी चल नहीं पाती थी, खाना बिल्कुल नहीं खा पाती थी, जबरदस्ती आधी रोटी खाती थी, बिस्तर से बिल्कुल उठ नहीं पाती थी, इतनी कमजोरी हो गयी थी।


            देहरादून के चारधाम हॉस्पिटल में डॉक्टर ने समस्यायें पूछीं और कुछ जाँचें करवायीं, जाँच आने के बाद डॉक्टर ने बताया कि आपकी पत्नी की किडनी फेल हो गयी हैं और ४ दिन इलाज चला, पूरे दिनभर ग्लूकोज चढ़ती थी, इंजेक्शन लगते थे और रात में घर भेज देते थे। कुछ आराम तो मिला, लेकिन उसी बीच फिर से सुगर लो हो गया और सुगर ४८ एमजी/डीएल आ गया, तो मैं देहरादून के महन्त इन्द्रेश हॉस्पिटल ले गया, वहाँ भी सारी जाँचें हुयीं तो जाँच में हेमोग्लोबिन १०, क्रिटनीन ५.७, यूरिया १३२, एएलपी १६८, फास्फोरस ६.४ आया। यहाँ भी खून के लिए इंजेक्शन लगता था। इस प्रकार महन्त इन्द्रेश हॉस्पिटल का १ हफ्ते इलाज चला, कुछ आराम मिला। लेकिन मैं फिर अपनी पत्नी को पतंजलि योगशिविर हरिद्वार ले गया। वहाँ पर डॉक्टरों ने सारी रिपोर्ट देखी और मना कर दिया पर उन्होंने ही मुझे आयुष ग्राम ट्रस्ट चिकित्सालय, चित्रकूट के बारे में बताया। मैं वहाँ से घर आ गया और दूसरे दिन अपनी पत्नी को लेकर चित्रकूट आ पहुँचा वह दिनांक ३० जनवरी २०२० थी।
            मैंने रजिस्ट्रेशन करवाया फिर मेरा नम्बर आने पर मुझे डॉ. अर्चना वाजपेयी, एम.डी. आयु.(कायचिकित्सा) की ओपीडी-५ में बुलाया गया। उन्होंने अच्छे से देखा और जाँच करवायी। जब मैं यहाँ पर अपनी पत्नी को लेकर आया तब उन्हें सुगर, हाई ब्लडप्रेशर था, भूख बिल्कुल भी नहीं लगती थी, पूरे शरीर में दर्द, चलने में समस्या, एक भी कदम चलने में श्वास फूलती थी, आँखों से धुँधला दिखाई देता था, घबराहट, बेचैनी, कमजोरी बहुत थी।



            क्रिटनीन ६.९ एमजी/डीएल, यूरिया १२९.९ एमजी/डीएल, हिमोग्लोबिन ८.० जीएम %, एएलपी २१६.८, सीआरपी १८.१ एमजी/डीएल, फास्फोरस ७३ आया। जाँच देखने के बाद मैंम ने १५ दिन रहने की सलाह दी। हम इसी तैयारी से आये ही थे। हमे अच्छा रूम १५*१२ का शौचालय, स्नानगार सहित मिल गया और चिकित्सा शुरू हो गयी। प्रतिदिन डॉक्टर राउण्ड पर आते, इलाज लिखते और पंचकर्म में इलाज होता। उचित खान-पान दिया जाता।
            अंग्रेजी डॉक्टरों ने सारे फल, दालें, प्रोटीन सब बन्द कर दिया था किन्तु आयुष ग्राम चित्रकूट में कढ़ी, दालें, कोप्ता, चावल, रोटी, फल भी समय-समय पर दिया जाता था, सेंधा नमक भी दिया जाता था। इससे हमारा पेट भर जाता था और खाना का संतोष होता था।
            इन १५ दिनों में पत्नी के रोग में बहुत सुधार आया। अब वह अपने से काम कर लेती हैं, श्वास फूलना बन्द हुआ, भूख अच्छी लगने लगी, बीपी व सुगर नार्मल रहने लगा है। 



क्रिटनीन घटकर ५.० पर और यूरिया ९१ पर आ गया, खून बढ़कर ९.४ हो गया। अब उन्होंने १५ दिन बाद १ माह की दवायें देकर डिस्चार्ज कर दिया, अगले माह फिर १५ दिन के लिये बुलाया गया।


            मैं बहुत खुश हूँ कि मेरी पत्नी को सिर्फ १५ दिन में आराम मिलने लगा और वह काफी अपने आप को स्वस्थ बताती हैं।
            मैं यहाँ के डॉक्टरों और स्टॉफ को धन्यवाद देता हूँ जो इतना अच्छा इलाज व सहयोग देते हैं।

मैं पतंजलि हरिद्वार वालों का भी आभारी हूँ जिन्होंने यहाँ का रास्ता बताया।

हारूली देवी
पत्नी श्री
यदुवीर सिंह (रिटायर्ड पुलिस),
देहरादून (उत्तराखण्ड) ७०१७३५३७३९




डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।

इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुसरण करते हैं ।
डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एल-एल.बी. (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 

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