आपका बच्चा स्वस्थ रहेगा मलाई वाले दूध से ही !!



डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी 
जिन नौनिहालों को दुनिया का भविष्य कहा जाता है उनका भविष्य घने अंधेरे में है। बच्चों में कुपोषण इस कदर बढ़ रहा है कि बच्चे कई रोगों के शिकार हो रहे हैं उनमें से न्यूमोनिया, मोटापा, पाचनतंत्र की खराबी प्रमुख है। भारत में हर चार मिनट पर पाँच साल से कम आयु के बच्चे की न्यूमोनिया से मौत हो रही है। भारत के हेल्थ एण्ड न्यूट्रिशन, सेव द चिल्ड्रेन के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. राजेश खन्ना कहते हैं कि न्यूमोनिया से होने वाली आधी मौतें तो सिर्फ कुपोषण से हो रही हैं। कुपोषण से होने वाली एक और चर्चित बीमारी है जिसका नाम है मोटापा। अब यह बच्चों में भी तेजी से फैल रही है। मोटापा के कारण बच्चों में भूलने की बीमारी बढ़ रही है, तो उधर जीएसबीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के बायोकेमिस्ट्री विभाग के विशेषज्ञों ने एक रिसर्च में पाया कि बच्चे समोसा, कचौड़ी, बर्गर, पिज्जा, चिप्स, नूडल्स, चाऊमीन, पैक्ड जंक फूड का सेवन अधिक करते हैं जिससे बच्चों में मोटापा, हाइपरटेंशन, हार्ट और ब्रेन से जुड़ी बीमारियाँ पैदा हो रही हैं। मोटापा मस्तिष्क को भी कमजोर करता है। मोटापे के कारण दिमाग भी शीघ्र बूढ़ा होने लगता है यह शोध मियामी यूनिवर्सिटी में भी हुयी।



            अमेरिका की वारमोंट और येल यूनिवर्सिटी ने साझा रूप से एक शोध किया कि मोटापा बच्चों की याददाश्त पर निश्चित रूप से असर डालता है। क्योंकि अधिक बी.एम.आई. वाले बच्चों का सेरिब्रल कोर्टेक्स काफी पतला हो जाता है। यह रिसर्च १० हजार बच्चों में किया गया। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ आस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च में पता लगाया कि मोटापे के कारण दिल की बीमारी, मधुमेह, कैंसर तंत्रिका सम्बन्धी बीमारी, साँस के रोग और मस्कुलोस्केलेटल की बीमारी होती है।

            बच्चों में मोटापे जैसा रोग जैसे-जैसे पनप रहा है इस पर दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार खोज कर रहे हैं। भारत में ९० के दशक तक बहुत कम बच्चे मोटापा से ग्रस्त पाये जाते थे किन्तु अब तो बच्चों में मोटापा बहुत ही तेजी से फैल रहा है।


            अमेरिका में इस पर लगभग २८ शोधों पर अध्ययन हुआ और १ साल से लेकर १८ साल तक २१००० बच्चों को इस रिसर्च में शामिल किया गया। उसमें यह पाया गया कि ऐसे बच्चे जिन्हें रोजाना फुल क्रीम दूध पिलाया जाता है उनमें मोटापा का खतरा उन बच्चों के मुकाबले ४० प्रतिशत कम होता है जिन बच्चों को लो फैट दूध दिया जाता है।

            इस रिसर्च से दुनिया को यह समझ लेना चाहिए कि भारत में बच्चों में मोटापा का इतिहास इसीलिए नहीं पाया जाता था कि भारत के घर-घर में आयुर्वेद का ज्ञान केवल पुरुषों को ही नहीं भारत की माताओं को भी होता है।

            आजकल घरों में यह चल रहा है कि दूधिये से लिये गये दूध को गृहणियाँ पकाकर या खौलाकर उसकी क्रीम  निकालती हैं फिर क्रीम निकाले दूध को बच्चे को पिलाती हैं। ऐसा करने वाली मातायें खबरदार हो जायें, क्योंकि वैज्ञानिकों ने अपने एक बहुत बड़े रिसर्च में पाया है कि यदि बच्चों को मोटापा से बचाना है तो देशी गाय का दूध दें और वह दूध फुल मिल्क (मलाई सहित)।


            यह मोटापा बढ़ने की पृष्ठभूमि वह केवल आधुनिक शिक्षा की भी देन है क्योंकि आधुनिक शिक्षित महिलाओं-पुरुषों को अपने मूल इतिहास, परम्परा, मूल विज्ञान, मूल चिकित्सा विज्ञान से उपहत किया गया। प्राचीन भारत के चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद में क्रीम रहित दूध देने का विधान ही नहीं था। दुनिया के महान् भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिक आत्रेय पुनर्वसु ने

गव्यं सर्पि: सर्पिषां गोक्षीरं क्षीराणाम्।। च.सू. २५/३८।।

लिखकर यह बता दिया था कि गोघृत और फुल क्रीम गो दुग्ध स्वभाव से हितकर आहार है। उन्होंने क्षीरं जीवनीयानाम्।। च.सू. २५/४० में लिखकर यह बताया कि जीवन रक्षा व पोषण के जितने द्रव्य हैं उनमें गोदुग्ध श्रेष्ठ है। इस सम्बन्ध में अन्नपानविधि अध्याय २७/२१७,२१८ में लिखा सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और अनुशीलनीय है-

‘‘स्वादु शीतं मृदु स्निग्धं बहलं श्लक्ष्णपिच्छिलम्।
गुरु मन्दं प्रसन्नं च गव्यं दशगुणं पय:।।
तदेवगुणमेवौज: सामान्यादभिवर्धयेत्।
प्रवरं जीवनीयानां क्षीरमुक्तं रसायनम् ।।’’

            यानी (फुल क्रीम) गोदुग्ध मधुर, शीत, मृदु, स्निग्ध, बहल, श्लक्ष्ण, पिच्छिल, गुरु, मन्द और प्रसन्न गुणों से सम्पन्न होता है। ये दश गुण ओजसे समानता रखते हैं अत: गोदुग्ध ओज धातुको बढ़ाता है। ओज धातुशुक्रधातु के पश्चात् श्रेष्ठ चयापचय क्रम में ही निर्मित होती है। इसीलिए सभी जीवनीय पदार्थों में श्रेष्ठ तथा रसायन है।

            अब यह तो निश्चित है न कि कोई भी आहारओज को तभी बढ़ायेगा जब ओज के पूर्व की धातुओं का निर्माण और पोषण (चयापचय-मेटाबोलिज्म) सम्यक्तया होगा तो जब गोदुग्ध ओजवर्धक है तो निश्चित है कि यह चयापचय (मोटाबोलिज्म) को ठीक करता है। इससे यह सिद्ध हो रहा है कि भारतीय मनीषियों को पहले से ज्ञात था कि फुल क्रीम गोदुग्ध ही चयापचय को ठीक रख सकता है।

            आजकल घरों में दूध को पकाकर उसकी मलाई को जमाकर घी निकाला जाता है और क्रीम रहित दूध बच्चे और बड़ों को जो सेवन कराया जाता है वह सेहत/मेटाबोलिज्म के लिए खतरनाक ही सिद्ध हो रहा है। अब तो बाजारों में भी क्रीम निकालने की मशीनें लग गयी हैं। क्रीम निकालकर ही दूधिया दूध को बेचता है।

            बच्चों को दूध पिलाने की चर्चा में ऋषि वाग्भट्ट लिखते हैं-

स्तन्याभावे पयश्द्दागंगव्यं वा तद्गुणं पिबेत् ।
ह्रस्वेन पंचमूलेन स्थिराभ्यां वा सितायुतम्।।
अ.हृ.उ. १/२०।।

            यानी यदि माँ के दूध न निकले या पर्याप्त मात्रा में निकाले तो बच्चे को बकरी का दूध पिलायें या बकरी के समान गुण वाला गाय का दूध पिलाना चाहिए। इसमें न तो पानी मिलाने की बात ऋषि ने कही न ही क्रीम रहित करने की। इसे सुपाच्य और पोषक करने के लिए लघु पंचमूल साधित करने की बात जरूर कही है। हमारे लिए गर्व की बात है कि अमेरिका जो आज जान पा रहा है वह भारत का वासी हजारों साल पहले जान गये थे।
            फुल क्रीम दूध मोटापा नाशक है और यह ज्ञान भारतवासियों को था इसका दमदार प्रमाण बालरोग चिकित्सा के महान् ग्रन्थ काश्यप संहिता में बहुत ही स्पष्ट प्राप्त होता है-

तथैव क्षीरसात्म्यस्य परं चैतद्रसायनम् ।
दृढ़ोपचित गात्रश्च निर्मेदकोजितश्रम:।।
                                    का॰ सं॰ खिलस्थान ५/४९

            अर्थात् क्षीरसात्म्यी बालक के लिये गोदुग्ध परम रसायन है उसका शरीर मजबूत होता है मेद (फैट) कम होता है तथा मेहनत करने में भी थकावट नहीं होती।
            इस प्रमाण से तो स्पष्ट हो गया न कि यह अमेरिका की कोई नहीं रिसर्च नहीं है बल्कि केवल पैकिंग बदली गयी है। वह इसलिये कि हम अपने भारतीय ज्ञान का न तो सही ढंग से उपयोग कर पा रहे न प्रस्तुतीकरण। भारत में पानी मिलाकर दूध देने या क्रीम रहित दूध देने का कहीं भी वर्णन नहीं है। शालिग्राम निघण्टुकार ने लगभग सवा सौ पहले एक संग्रह ग्रन्थ तैयार करने में बहुत श्रम किया और उन्होंने अन्य द्रव्य गुणों के वर्णन क्रम में दुग्ध वर्ग के गुण उपयोग का विभिन्न शास्त्रों के आधार अच्छा संकलन किया था। पर उन्होंने भी क्रीम रहित दूध की गुणवत्ता कहीं भी नहीं पायी और न ही उद्धृत किया।

            इस प्रकार क्रीम निकालकर दूध सेवन करना या कराना या पानी मिलाकर दूध पिलाना जहाँ आयुर्वेद विरुद्ध है वहीं अवैज्ञानिक भी है।

            इस क्रम में एक घटना मुझे स्मरण आती है मेरे बेटे को ३ साल की आयु में भयंकर अतिसार हो गया। उसे पिता जी किसी की सलाह पर आधा पानी मिला पका दूध पिलाते थे मैं उस समय आयुर्वेद शिक्षा में प्रवेश ही लिया था। अतिसार किसी भी चिकित्सा से बन्द नहीं हो रहा था तो पूज्य पिता जी बच्चे को लेकर बाँदा के तत्कालीन एलोपैथिक फिजीशियन डॉ॰ भार्गव को दिखाया उन्होने कहा कि आप तत्काल पानी मिला दूध बन्द करिये और धारोष्ण दूध पिलाइये और कुछ सामान्य सी दवायें दे दी। चमत्कार हो गया जैसे ही धारोष्ण दूध शुरू किया गया, धीरे-धीरे अतिसार मिट गया। यह सूझ बूझ थी एक अंग्रेजी डॉक्टर की और जिस भारत में अथाह अपरिमित चिकित्सा ज्ञान का भण्डार है वे ध्यान नहीं दे पा रहे।


डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।



इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुशरण करते हैं ।


डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।



सरकार आयुष को बढ़ाये मानव का जीवन बचाये!!
     सरकार को फिर से भारत में अंग्रेजी अस्पताल और अंग्रेजी मेडिकल कॉलेजों की जगह अच्छे और समृद्ध आयुष संस्थान खोलने चाहिए तथा उनसे पूरी क्षमता से कार्य लेना चाहिए। इससे भारत का मानव हार्ट के ऑपरेशनछेड़छाड़ स्टेंट और डायलिसिस जैसी स्थितियों से बचकर और हार्ट को स्वस्थ रख सकेगा। क्योंकि हार्ट के रोगी पहले भी होते थे आज भी होते हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिनका सर्वोच्च समाधान आयुष में है। आयुष ग्राम चित्रकूट एक ऐसा आयुष संस्थान है जहाँ ऐसे-ऐसे रस-रसायनों/ औषध कल्पों का निर्माण और संयोजन करके रखा गया है जो जीवनदान देते हैं। पंचकर्म की व्यवस्था एम.डी. डॉक्टरों के निर्देशन में हो रही हैपेयाविलेपीयवागू आदि आहार कल्पों की भी पूरी उपलब्धता है इसलिये यहाँ के ऐसे चमत्कारिक परिणाम आते हैं।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी         आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत), एलएल-बी (B.U.)
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव और आयुष ग्राम मासिक
पूर्व उपा. भारतीय चिकित्सा परिषद
उत्तर प्रदेश शासन 
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 



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1 Comments

  1. आयुर्वेद जगत के लिए परम आदरणीय श्री डाक्टर साहब ने जो योगदान दिया है! उसके लिए उन्हें सैकड़ों सालों तक याद किया जाएगा! उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को आधुनिक चिकित्सा के समकक्ष खड़ा कर दिया है!
    अब के नहीं जागे तो/
    अपने हक नहीं मांगें तो//
    चूर्ण चटनी ही बांटेंगे/
    घर के कुत्ते घर में काटेंगे//

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