हार्ट रोगों और डायबिटीज से बचना है तो धीरे-धीरे खायें, ३२ बार चबाने का नियम बना विज्ञान !!



डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी 

 आज जो मेडिकल साइंस के नये-नये रिसर्च आ रहे हैं उन्हें पढ़कर कई बार ऐसा लगता है कि ये रिसर्च क्या हैं? महज हमारे भारतीय ज्ञान आयुष विज्ञान के ही गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठाने का साधन मात्र रह गया है। इन्हें पढ़कर यह भी एक बार लगता है कि अब तो भारत को आयुर्वेदमय बना देना चाहिए और सरकार को भी एक मजबूत कानून बनाकर जन-जन को आयुर्वेद के नियमों में बाँध देना चाहिए। यह बाध्यता सरकार के चिकित्सा बजट को घटा देगी तो उधर भारत का मानव पहले की तरह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ, सशक्त तथा प्रतिभा सम्पन्न हो जायेगा क्योंकि अंग्रेजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अंग्रेजी चिकित्सा सुविधा भारत में रोग तथा रोगियों को नहीं घटा पा रही। अभी-अभी प्रकाशित एक नये शोध को ही ले लीजिए जो कि चर्चा का विषय बना हुआ है।

            जापान की हीरोशिमा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. ताकायुकी यामा जी और उनकी टीम ने लगातार पाँच साल तक सैकड़ों लोगों पर खाना खाने की गति और मेटाबॉलिक सिण्ड्रोम के बीच सम्बन्धों पर रिसर्च पूर्ण अध्ययन किया तो पाया कि जल्दी-जल्दी भोजन करने से मेटाबोलिक सिण्ड्रोम के पाँच जोखिम रहते हैं हृदय रोग, मधुमेह, स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्राल।


            इन वैज्ञानिकों ने आगाह कर दिया कि यदि आप जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो खबरदार हो जायें अन्यथा वजन बढ़ना पाचन तंत्र की गड़बड़ी, मधुमेह और हार्ट रोग की घण्टी बजेगी ही। यह आदत आपके कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है।
            इस रिसर्च पर यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम के वैज्ञानिकों ने भी मुहर लगा दी कि खाना को अच्छी तरह चबाकर खाने से कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है।
            इस रिसर्च पर भले ही कोई अनजान व्यक्ति ताली बजाये पर भारतवासी और भारत के महान् चिकित्सा विज्ञान आयुष के स्नातक तो अच्छी तरह जानते हैं कि रिसर्च नहीं बल्कि भारत के शोध पर विदेशियों ने केवल अपना कवर लगाया है। क्योंकि भारत के गाँवों तक के लोग अपने बच्चों को चबा-चबाकर भोजन करने की आदत डालते थे, कहते थे कि दाँत ३२ हैं इसलिए एक कौर (कवल/ग्रास) को भी ३२ बार चबाना चाहिए।


            भारत के महान् चिकित्सा वैज्ञानिक आचार्य चरक तो ५००० साल पहले इस पर अपना अध्ययन इस प्रकार प्रस्तुत कर चुके थे जिसे प्रत्येक आयुर्वेद स्नातक ने पढ़ रखा है-

‘‘नातिद्रुतमश्नीयात्, अतिद्रुतं हि भुञ्जानस्योत्स्नेहनमवसादनं भोजनस्याप्रतिष्ठानं च, भोज्यदोषसाद्गुण्योपलब्धिश्च न नियता:, तस्मान्नातिद्रुतमश्नीयात्।। (च.वि. १/७।।’’)
            अर्थात् बहुत जल्दी-जल्दी भोजन नहीं करना चाहिए। बहुत जल्दी-जल्दी भोजन करने से भोजन उन्मार्ग गमन करने लगता है यानी भोजन पोषण (स्नेहन) के स्थान पर बीमारी देने लगता है, चयापचय क्रिया को अवसादित करने लगता है, भोजन का प्रभाव  सही रूप से शरीर में प्रतिष्ठापित नहीं हो पाता। इसके अलावा जल्दी-जल्दी खाने से भोजन के गुण-दोष की उपलब्धता भी नहीं हो पाती।
            भगवान् धन्वन्तरि भी सूत्र स्थान ४६/४६६ में स्पष्ट लिखते हैं कि न अधिक शीघ्रता से और न अधिक धीमा खाया हुआ आहार ही निर्दोष रहता है तथा ठीक तरह से पचता है।



            आज के २७ साल पहले मुझे एक युवा साधू हँसते-खिलखिलाते हुये मिले। मैं २-३ दिन उनके साथ रहा, तब मैं आयुर्वेद का विद्यार्थी था, मैंने भोजन के समय देखा कि वह साधु बहुत जल्दी-जल्दी भोजन करते थे। मैंने कहा कि महाराज जी आप तो बहुत जल्दी भोजन करते हैं उन्होंने कहा कि हाँ! ६-७ रोटी, चावल, सब्जी, आचार खाने में मुझे केवल ५-७ मिनट ही लगते हैं। अभी पिछले साल पनगरामें वही साधु मुझे फिर मिले मैंने और उपचार हेतु आये, मैंने देखा कि उन्हें कोलेस्ट्रोल, घुटनों का दर्द, हार्ट रोग, लिवर खराबी सब तो था।

            आज दुनिया के वैज्ञानिक अपने शोधों में भारतीय चिकित्सा विज्ञान आयुर्वेद शास्त्र में वर्णित सिद्धान्तों को वैज्ञानिकता से लबालब पा रहे हैं। यह भारत और भारतीयों के लिए गर्व की बात है।           



डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी
डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी एक प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ हैं। शास्त्रीय चिकित्सा के पीयूष पाणि चिकित्सक और हार्ट, किडनी, शिरोरोग (त्रिमर्म), रीढ़ की चिकित्सा के महान आचार्य जो विगड़े से विगड़े हार्ट, रीढ़, किडनी, शिरोरोगों को शास्त्रीय चिकित्सा से सम्हाल लेते हैं । आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूटधाम, दिव्य चिकित्सा भवन, आयुष ग्राम मासिक, चिकित्सा पल्लव और अनेकों संस्थाओं के संस्थापक ।



इनके शिष्यों, छात्र, छात्राओं की लम्बी सूची है । आपकी चिकित्सा व्यवस्था को देश के आयुष चिकित्सक अनुशरण करते हैं ।


डॉ. अर्चना वाजपेयी

डॉ. अर्चना वाजपेयी एम.डी. (मेडिसिन आयु.) में हैं आप स्त्री – पुरुषों के जीर्ण, जटिल रोगों की चिकित्सा में विशेष कुशल हैं । मृदुभाषी, रोगी के प्रति करुणा रखकर चिकित्सा करना उनकी विशिष्ट शैली है । लेखन, अध्ययन, व्याख्यान, उनकी हॉबी है । आयुर्वेद संहिता ग्रंथों में उनकी विशेष रूचि है ।



सरकार आयुष को बढ़ाये मानव का जीवन बचाये!!
     सरकार को फिर से भारत में अंग्रेजी अस्पताल और अंग्रेजी मेडिकल कॉलेजों की जगह अच्छे और समृद्ध आयुष संस्थान खोलने चाहिए तथा उनसे पूरी क्षमता से कार्य लेना चाहिए। इससे भारत का मानव हार्ट के ऑपरेशनछेड़छाड़ स्टेंट और डायलिसिस जैसी स्थितियों से बचकर और हार्ट को स्वस्थ रख सकेगा। क्योंकि हार्ट के रोगी पहले भी होते थे आज भी होते हैं और आगे भी होते रहेंगे। जिनका सर्वोच्च समाधान आयुष में है। आयुष ग्राम चित्रकूट एक ऐसा आयुष संस्थान है जहाँ ऐसे-ऐसे रस-रसायनों/ औषध कल्पों का निर्माण और संयोजन करके रखा गया है जो जीवनदान देते हैं। पंचकर्म की व्यवस्था एम.डी. डॉक्टरों के निर्देशन में हो रही हैपेयाविलेपीयवागू आदि आहार कल्पों की भी पूरी उपलब्धता है इसलिये यहाँ के ऐसे चमत्कारिक परिणाम आते हैं।

आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
   
आयुष ग्राम चिकित्सालय:चित्रकूट 
   मोब.न. 9919527646, 8601209999
 website: www.ayushgram.org



  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी        आयुर्वेदाचार्यपी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.) एन.डी.साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि (आयुर्वेद)एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत )
 प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव
                                  
डॉ अर्चना वाजपेयी                              एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ परमानन्द वाजपेयी                                                                   आयुर्वेदाचार्य



डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 






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