हार्ट रोगी अमरनाथ की यात्रा कर आया : आयुष चिकित्सा का अप्रतिम प्रभाव !!

हार्ट की चिकित्सा कर रहे अंग्रेजी डॉक्टरों और अस्पतालों की स्थिति ऐसी बन गयी है कि वे रोगी को ऐसे डरवाते हैं कि करवट भी लेना तो मुझसे पूछकर लेना, लेट्रिन में भी यदि हमसे बिना पूछे बैठेंगे  तो हार्ट अटैक हो जायेगा। क्या बना रखा है इन लोगों ने?
उनका डरवाना भी सही है, क्योंकि अंग्रेजी डॉक्टरी में हार्ट की ऐसी प्रभावशाली चिकित्सा है ही नहीं जैसी आयुष में है और थी।  जिस पर आयुष ग्राम ट्रस्ट के डॉक्टरों, चिकित्सा वैज्ञानिकों ने निरन्तर अध्ययन किया, परिणाम यह आया कि प्रतिवर्ष हजारों र्हौै रोगी निरोग होने लगे। हमारा वैदिक चिकित्सा विज्ञान ‘हार्ट’ की चिकित्सा में वैज्ञानिक आधार लेता है कि-
¬ रोगी हार्ट अटैक से बच जाता है। 
¬ हार्ट की लाइफ बहुत बढ़ जाती है यदि रोगी हार्ट को खराब न करे।
¬ स्टेंट या बाईपास सर्जरी कराये रोगी जो अपने को सेहतमन्द नहीं मानते उन्हें भी नया जीवन मिलता है। 
¬ रोगी की यदि उम्र है और शरीर में सामथ्र्य है तो आयुष से हार्ट की चिकित्सा रोगी को पुनर्यौवन तक दे देती है। 
ऐसे ही एक केस रहाटीकर, प्रतापगढ़ (उ.प्र.) से ५ अक्टूबर २०१८ को आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूट की आयुष कार्डियोलॉजी में अमरचन्द्र कौशल उम्र ४४ आये। उनका ओपीडी रजिस्टे्रेशन नम्बर १३/१०२९१ हुआ। अपना क्रम आने पर उसके घर वाले रोगी को चिकित्सक कक्ष में लेकर आये। 
आयुष ग्राम के डॉक्टरों ने नाड़ी, मूत्र, मल, जीभ, शब्द, दृगाकृति आदि के माध्यम से रोगी की परीक्षा प्रारम्भ की। केसहिस्ट्री के क्रम में स्पष्ट हुआ कि श्री अमरचन्द्र कौशल के सीने में मीठा-मीठा दर्द होना शुरू हुआ, पहले तो उन्होंने ध्यान नहीं दिया पर धीरे-धीरे यह दर्द बढ़ता गया, सीढ़ी चढ़ने और चलने-फिरने में सीने में दर्द होना शुरू हो गया। ५० मीटर चलने में भी छाती में दर्द होता था। 
१८ अप्रैल २०१८ को श्री अमरचन्द्र कौशल जी को इन्दुज हार्ट एण्ड मेडिकल सेण्टर गोमती नगर, लखनऊ ले गये। जहाँ एंजियोग्राफी की गयी, रिपोर्ट में बताया गया कि LAD-Prox में ८० प्रतिशत Mid ३०प्रतिशत ब्लॉकेज हैं। 
श्री कौशल ने बताया कि लखनऊ में डॉक्टरों ने एंजियोप्लास्टी (स्टेंट) की सलाह दी थी। पर हमने स्टेंट डलवाने से मना कर दिया क्योंकि मेरी एक पड़ोसी स्टेंट डलवाने के बाद भी परेशान है। आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूट की आयुष कार्डियोलॉजी में चले आये। क्योंकि आयुष ग्राम हार्ट से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं होती, केवल और केवल औषधियों से ठीक किया जाता है। 
आयुष ग्राम चित्रकूट में आयुर्वेदीय परीक्षण के क्रम में रोग की सम्प्राप्ति का अध्ययन प्रारम्भ किया गया तो पाया गया कि-
श्री अमरचन्द्र कौशल की केसहिस्ट्री से पता चला कि रोगी लम्बे समय से चाय-कॉफी, ब्रेड, पाव रोटी, बिस्किट, रूक्ष आहार (Dry diet) का सेवन करता था, काम-काज के मामले में भागदौड़ थी ही, वे दोनों काम शरीर के वात (gases) दोष को कुपित (Aggrivate) करने वाले थे। इससे रसधातु की दुष्टि  ओजक्षय  स्रोतोरोध (प्राणवह)  धमनी प्रतिचय (Obstruction of Arteries)  उर:शूल  हृद्रोग (Cardiac Disorders)। 
अब एक प्रश्न बनता है कि वातवर्धक खान-पान और रहन-सहन से ब्लॉकेज की परिस्थिति कैसे बन गयी? तो यह जानने के लिए भगवान् पुनर्वसु आत्रेय के निम्नांकित सूत्र को जानना पड़ेगा। 
आहारश्च विहारश्च य: स्याद्दोषगुणै: सम:। 
धातुभिर्विगुणश्चापि स्रोतसां स प्रदूषक:।। 
च.वि. ५/२३।।
अर्थात् दोषों के समान गुणधर्म वाली जीवनशैली अपनाने या दोषों को बढ़ाने वाली जीवनशैली अपनाने तथा धातुओं के विपरीत गुण वाली जीवनशैली या धातु ह्रासकारी जीवनशैली अपनाने से शरीर के स्रोत (Channel) दूषित हो जाते हैं। 

अमरचन्द्र कौशल में वात दोष को बढ़ाने वाली जीवनशैली से वातदोष बढ़कर भ्रमणशील आहार रस के साथ पहले सूक्ष्म स्रोतों को फिर स्थूल स्रोतों को दूषित करने लगे। जिससे स्रोतों में क्रियात्मक विकृति (Abnormelty) आती गयी और कालान्तर में रचनात्मक विकृति भी आती गयी। ज्यों-ज्यों क्रियात्मक वकृति  (Abnormelty) आती जाती है त्यों-त्यों स्रोतों के जो कर्म हैं उनका सम्पादन सम्यक् रूप से नहीं हो पाता। दूषित (विकृत) वायु का रसवह स्रोतस् और प्राणवह स्रोतस् से सम्बन्ध बनने से ब्लॉकेज होने लगा।
क्योंकि-
स्रंसभ्रंसव्याससंगभेदसादहर्षतर्षकम्पवर्तचालतोदव्यथाचेष्टादीनि।। च.सू. २०/१२।। 
के अनुसार वायु हृदय की धमनियों में पहुँचकर ‘संग (अवरोध)’ करने लगा, छाती में दर्द करने लगा, साद (थकावट) करने लगा। 
इस प्रकार रोग के मूल कारण तक का अध्ययन हो जाने पर चिकित्सा करना बहुत ही सरल होता है। ऐसे रोग में भगवान् पुनर्वसु निर्देश देते हैं कि-
तं मधुराम्ललवणस्निग्धोष्णैरुपक्रमैरूपक्रमेत्, स्नेहस्वेदास्थापनानुवासनस्त: कर्मभोजनाभ्यङ्गोत्सादनपरिषेकादि ... ... ... नियतो विन्तशस्तद्वत्।।  च.सू. २०/१३
तदनुसार श्री अमरचन्द्र कौशल काअभ्यंग, अनुवासन, निरूह क्रिया, सिद्धार्थक स्नान से उत्सादन (उबटन), शिरोबस्ति, शिरोधारा कराया गया। 
औषधि व्यवस्था में-  स्निग्ध और उष्णवीर्य युक्त औषधि (जो प्राणवह, रसवह संस्थान में कार्यकारी हो तथा हृद्य, ओजस्कर, ऊर्जास्कर हो) का चयन किया गया।

  •  कस्तूर्यादि गुटी (सहस्रयोग) ६० गोली + त्रिनेत्र रस ५ ग्राम + मृगांक वटी (विभीतिकामज्जा युक्त) ५ ग्राम वंशलोचन ५ ग्राम सभी घोंटकर ६० मात्रा। १-१ मात्रा दिन में २ बार भोजन के बाद। यह योग हृद्य, ओजवर्धक, वातानुलोमक और स्रोतस प्रसादक है। 
  • इन्द्रवरुणिकादि चूर्ण (र.सा.सं.) ५-५ ग्राम खाना के बाद गरम जल से। यह चूर्ण वातानुलोमक, पक्वाशयगत वात निर्हरक तथा रेचक भी है। इसलिए इसकी मात्रा संतुलित ही देना चाहिए अन्यथा मल के साथ रक्तस्राव भी होने की सम्भावना होती है। 
  •  रात में सोते समय- इन्दुकान्त घनवटी २ गोली। 

पथ्य में- मूँग की दाल, सेन्धा नमक युक्त, गोघृत, चना-गेंहूँ की चपाती, माड़ रहित भात, पक्व शीत जल सेवन कराया गया। 
आश्चर्य जनक परिणाम-

  • एक माह की चिकित्सा से ऐसा आश्चर्यजनक परिणाम आया कि जहाँ रोगी श्री अमरचन्द्र कौशल ५० मीटर चलने में छाती में दर्द से बेहाल हो जाता था वहाँ २ कि.मी. चलने लगा। सीढ़ियाँ चढ़ने में भी उसे दिक्कत नहीं थी। 
  • ३ माह की चिकित्सा से वह अपना सारा काम अच्छे ढंग से करने लगा और कहने लगा कि मेरा हार्ट पूरी तरह स्वस्थ हैं और मुझे न तो स्टेंट और न तो बाईपास सर्जरी की जरूरत है। 
  • ३ माह बाद इन्द्रवरुणिकादि चूर्ण के स्थान पर ब्राह्मी द्राक्षादि कषाय (सहस्रयोग) २०-२० मि.ली. बराबर उबालकर ठण्डा किये जल के साथ सेवन करने को लिखा। क्योंकि रोगी में वात, पित्त की वृद्धि, दाह और मांसपेशियों की कमजोरी बता रहा था। 
  • ६ माह तक में श्री कौशल जी में बीमारी के लक्षण पूरी तरह से मिट गये। अब तो श्री अमरचन्द्र कौशल को १-२ दिन छोड़कर ही दवाइयाँ लेने का निर्देश दिया गया। श्री अमरचन्द्र कौशल जी बिना क्रम तोड़े लगातार आयुष ग्राम चित्रकूट में ‘फलोअप’ में आते गये। जून के अंतिम सप्ताह तक वे कहने लगे कि सर! मुझे लगता ही नहीं कि मैं कभी बीमार रहा। उसने आयुष ग्राम चित्रकूट के डॉक्टरों से सलाह ली कि क्या मैं मैहर और अमरनाथ यात्रा कर सकता हूँ। परीक्षण के बाद हमने यात्रा की अनुमति दे दी। 

९ जुलाई २०१९ को श्री कौशल जी अमरनाथ जी की यात्रा में निकले और बिना किसी तकलीफ के जवानों की तरह वह चढ़ाई पूरी करके आये। यह है आयुष चिकित्सा का अप्रतिम प्रभाव। 
आप बतायें कि अंग्रेजी चिकित्सा करा रहे किसी हार्ट (सीएडी) (ब्लॉकेज) के रोगी को अंग्रेजी डॉक्टर अमरनाथ की चढ़ाई की अनुमति दे सकते हैं। वे तो यही कहेंगे कि यदि आपने स्टेंट नहीं डलवाया तो अमरनाथ जी क्या आपके तो यहीं चलते-चलते प्राण चले जायेंगे। पर वैदिक चिकित्सा विज्ञान के चिकित्सा सूत्र, पद्धति, विधि और क्रिया हार्ट रोगी को ऐसा ही सामथ्र्य देती है। जब इसी प्रकार आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चित्रकूट में हर माह हार्ट रोगियों को सर्जरी और स्टेंट से बचाया जा रहा है। कोई भी जाकर अमरचन्द्र कौशल जी को देख सकता है। 
श्री कौशल जी के लोकहित में विचार- 

आयुष चिकित्सा से हार्ट ऐसा स्वस्थ हुआ कि अमरनाथ जी की यात्रा की!! 



अमरनाथ की यात्रा करके
लौटे अमरचन्द्र कौशल जी 
मुझे सन् २०१८ में एक दिन अचानक सीने में दर्द उठा, तो मुझे मेरे परिवार वाले तुरन्त लखनऊ ले गये, वहाँ पर डॉ. राजीव जी ने जाँच करवायी, तो एंजियोग्राफी करवाने पर पता चला कि मेरे हार्ट में एक ८०% और एक ३०% ब्लॉकेज है, मैं घबरा गया और डॉ. साहब ने कहा कि अब तुम्हे स्टेंट ही डलवाना पड़ेगा, इसके अलावा आप कभी ठीक नहीं हो सकते। मेरी उस समय बहुत श्वास फूलती थी जिससे मैं दो कदम चलने में असमर्थ था, तभी मुझे मेरे मित्र के द्वारा आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट के आयुष कार्डियोलॉजी के बारे में पता चला। मेरे परिवार के लोग यहाँ लेकर आये। यहाँ आने पर मेरा पर्चा बना, मेरा नम्बर आने पर मुझे बुलाया गया, मुझे सर ने देखा, सारी रिपोर्टें देखीं, नाड़ी देखी फिर कहा कि मैं आपको बिना ऑपरेशन के पूरी तरह स्वस्थ करूँगा। एलोपैथ की दवायें भी सारी छुड़वा दूँगा और ऐसा ही हुआ। १ माह की चिकित्सा से ही मेरी एलोपैथ की दवायें छूट गयीं और मेरी श्वास फूलना बिल्कुल बन्द हो गयी और सीने के दर्द में भी आराम मिलने लगा।
३ माह के इलाज से मैं अपने आपको ८५% स्वस्थ्य समझने लगा। चौथे माह मैंने दवा ली और चित्रकूट के कामतानाथ जी के दर्शन किए और पूरा परिक्रमा किया, पाँचवें माह मैहर गया वहाँ की भी सारी सीढ़ियाँ चढ़े मुझे कुछ भी दिक्कत नहीं हुयी। मैं अब बहुत खुश था कि जो मैं ५० मीटर भी नहीं चल सकता था वहाँ आज मैं दौड़ रहा हूँ। अंग्रेजी डॉक्टर डरवाते थे कि आप बिना स्टेंट डलवाये ठीक ही नहीं हो सकते। ९ जुलाई २०१९ को अमरनाथ जी गया और वहाँ दर्शन करके लौटा। 

अब यहाँ की भी दवायें डॉक्टर साहब ने बहुत कम कर दी हैं और कहा है कि १ माह बाद यहाँ की भी दवाओं की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी मैं ऐसे ही बिल्कुल स्वस्थ्य रहूँगा। 
मुझे आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूट ने हार्ट के ऑपरेशन से बचा लिया और मुझे बिल्कुल स्वस्थ्य बना दिया। मैं तो अंत में यही कहता हूँ कि यदि अंग्रेजी डॉक्टर आपको हार्ट, रीढ़ या किसी ऑपरेशन के लिए कहें तो पहले आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट में आकर एक बार अवश्य दिखायें। आपको भी मेरी तरह फायदा होगा ऐसी उम्मीद रखें। 

अमरचन्द्र कौशल 
रहाटीकर, प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
मोबा.नं.- ९९३६२७२२१६

लेख के अंत में हम पाठकों से यही कहते हैं कि इस ज्ञान का प्रचार-प्रसार करें तथा सभी को अपने भारत की महान् चिकित्सा पद्धति के बारे में बतायें, जागरूक करें, ताकि दूसरे भी स्टेंट और बाईपास सर्जरी के जाल से बच सकें और मानवता का कल्याण हो एवं भारतीय ज्ञान विज्ञान का प्रकाश हो। 


         आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
           आयुष ग्राम चिकित्सालयम, चित्रकूट 
            मोब.न. 9919527646, 8601209999
             website: www.ayushgram.org




  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी                                                आयुर्वेदाचार्य, पी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.)                   एन.डी., साहित्यायुर्वेदरत्न,विद्यावारिधि, एम.ए.(दर्शन),एम.ए.(संस्कृत )       
          प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव                                   
डॉ परमानन्द वाजपेयी 
          बी.ए.एम.एस., एम.डी.(अ.)

डॉ अर्चना वाजपेयी                                                                    एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

डॉ आर.एस. शुक्ल                                                                           आयुर्वेदाचार्य 


                                    



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