हार्ट में स्टेंट (एंजियोप्लास्टी) से नहीं : आयुष चिकित्सा से मिलता जीवन!!

सन् २०१६ की आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालयम्, चित्रकूट की ओपीडी में सतना (म.प्र.) से श्री विनोद कुमार गर्ग अपनी माँ श्रीमती कमला गर्ग को लेकर आये। रजिस्ट्रेशन हुआ, फिर अपना क्रम आने पर आये। केसहिस्ट्री क्रम में उन्होंने बताया कि सन् २०१० में सीने में दर्द हुआ और साँस फूलने लगी, सीढ़ियाँ चढ़ने में तकलीफ होने लगी। 
हम इन्हें जबलपुर के एक हास्पिटल ले गये वहाँ उन्होंने एंजयोग्राफी की और कहा कि ७० प्रतिशत ब्लॉकेज हैं, स्टेंट डालना पड़ेगा, यदि स्टेंट नहीं डलवायेंगे तो जान भी जा सकती है। 
हमने डॉक्टरों के डरवाने पर स्टेंट डलवा लिया, अंग्रेजी दवाइयाँ भी चलती रहीं। 

  • किन्तु दो साल बाद फिर साँस फूलने लगी, सीढ़ियाँ चढ़ने में तकलीफ होने लगी। हम फिर जबलपुर के सिटी अस्पताल ले गये वहाँ उन्होंने फिर एंजियोग्राफी की और कहा कि हार्ट में फिर ब्लॉकेज हो गये, अब बाईपास सर्जरी करनी पड़ेगी, अन्यथा मरीज खत्म हो जायेगा। 
  • अब हमारी माँ न तो हार्ट के ऑपरेशन के लिए तैयार हैं न स्टेंट के लिए, कहती हैं कि मरना स्वीकार है। इतना कहकर विनोद गर्ग ने आँसू भर दिये। 

उन्हें आश्वस्त किया गया कि आप परेशान बिल्कुल न हों। आयुष ग्राम ट्रस्ट, चित्रकूट की आयुष कार्डियोलॉजी में हार्ट पर बहुत अच्छे तरीके से काम किया जा रहा है। रोज अनेकों हार्ट रोगी ऑपरेशन और स्टेंट से बच रहे हैं तथा जिन रोगियों का स्टेंट डालने के बाद फिर ब्लॉकेज हुये उनमें भी सफलता मिलती है। 
श्रीमती कमला देवी को सीने में दर्द, घबराहट, चलने में साँस फूलना, आत्मविश्वास की कमी, उल्टी की इच्छा, भारीपन, गैस बनना, बिना श्रम किये थकावट, उत्साहहीनता, कब्ज और अरुचि थी। वह बार-बार कह रही थी कि जब एक बार छाती में छल्ला डलवाने से फायदा नहीं हुआ और रुपया भी बहुत लग गया तो अब मरना ही है। 
श्रीमती कमला देवी की कौंसिलिंग की गयी, उसे समझाया गया कि आप बिल्कुल निश्चित रहें आप पूरी तरह से ठीक होंगी। 

श्रीमती कमला देवी की रक्तजाँच करायी तो सीआरपी और कोलेस्ट्राल बढ़ा हुआ था। 

आयुर्वेद पद्धति से जब रोग के मूल कारण की खोज की गयी तो सामने यह आया कि श्रीमती कमला देवी में जठराग्नि मन्द थी जिसके कारण खाये-पिये आहार का सम्यक् पाचन और शोषण नहीं हो रहा था और अन्तत: शरीर में अपक्व ‘आम रस’ (एक प्रकार का विष) बन रहा है। इससे पोषित दोष ‘साम’ कहे जाते हैं। जब आम विष से युक्त दोष शरीर में बन जाते हैं तो शरीर में वैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं जैसे श्रीमती कमला देवी में थे। इन लक्षणों के आधार पर स्पष्ट हो रहा था कि रोगी के शरीर में वात, पित्त, कफ, दोष ‘आम विष’ से युक्त हैं। ये लक्षण हैं- स्रोतोरोध, (चैनल्स में रुकावट, तभी धमनियों में रुकावट होती है।) दुर्बलता, शरीर में भारीपन, वायु की रुकावट, आलस्य, खाये-पिये भोजन का अच्छी तरह न पचना, थूक का अधिक बनना, मलों का अवरोध (कब्ज, इत्यादि) भोजन की इच्छा न होना और बिना मेहनत के थकावट होना। 

वाग्भट्ट बताते हैं-
स्रोतोरोध बलभ्रंश गौरवानिलमूढ़ता आलस्यापक्तिनिष्ठीव मलसङ्गारुचिक्लमा:। 
लिङ्ग मलानां सामानां निरामाणां विपर्यय:।।
(अ.हृ.सू. १३/२३-२४।। 
इस प्रकार कुछ और किन्तु अंग्रेजी अस्पताल और डॉक्टर, स्टेंट डालकर ठीक करना चाहते हैं, इकोस्प्रीन खिलाकर रोगी को स्वस्थ करना चाहते हैं। जो कतई सम्भव ही नहीं है। यही कारण है आज लाखों स्टेंट डलवाये और बाईपास सर्जरी करवाये लोग कराह रहे हैं, अधमरा जीवन बिता रहे हैं। पर समस्या यह भी तो है कि रोगियों को सही दिशा देने वाला भी तो कोई नहीं है। अंग्रेजी अस्पतालों की दशा यह है कि वहाँ चाहे राम जाये और हार्ट की परेशानी बताये तो उसे भी इकोस्प्रीन और श्याम जाये तो उसे भी इकोस्प्रीन। जो धीरे-धीरे शरीर को गलाती ही जाती है। 
श्रीमती कमला देवी में लम्बे समय से एक आदत थी दो-तीन चाय पीकर १-२ बजे तक भोजन करना। इस कारण वे शरीर का वात कुपित होता गया क्योंकि वातिक रोग के कारणों में लंघन, अत्यन्त मेहनत, कसैले रस (चाय, कॉफी) का अति सेवन, रूखा-सूखा भोजन करते रहने से शरीर में वात (विभिन्न Gases) की विकृति (abnormality) हृदय में जाकर रसादि धातुओं का दूषित करना अग्निमांद्य साम रसधातु का निर्माण → ओजक्षय स्रोतोरोध  धमनी प्रतिचय (artery introduction) छाती में दर्द → हृदय रोग। 
जब हम आचार्य सुश्रुत और चरक को पढ़ते हैं कि-

वेपथुर्वेष्टनं स्तम्भ: प्रमोह: शून्यता दर:।
हृदि वातातुरे रूपं जीर्णे चात्यर्थवेदना।।
च.सू. १७/३१।।
आमम्यते मारुतजे हृदयं तुद्यते तथा। 
निर्मथ्यते दीय्र्यते च स्फोट्यते पाटयतेऽपि च।।
सु.उ. ४३/६।।
अर्थात् खिंचावट, निर्मथन (crushing pain), तोद (pricking pain), फफोले की तरह का दर्द, जकड़ाहट, मूच्र्छा, वेपथु (palpitations) लक्षण ये वातिक हृद्रोग के हैं। जो श्रीमती कमला देवी में थे। 

श्रीमती कमला देवी के रोग के कारण की सही पहचान हो जाने पर निम्नांकित चिकित्सा व्यवस्था की गयी-

१. आद्र्रकखण्ड अवलेह ५-५ ग्राम भोजन के पूर्व सामदोषों के निवाराणार्थ और स्रोतोरोध नाश के उद्देश्य से। 
२. पश्चात् पंचकर्म चिकित्सा योगबस्ति, हृदयबस्ति, पादाभ्यंग, शिरोधारा दी गयी इससे विकारों का निष्कासन हुआ और शरीर का पोषण प्रारम्भ हुआ जिससे निर्बलता दूर होने लगी। 
३. रत्नाकर रस ३ ग्राम, त्रिनेत्ररस विशेष ५ ग्राम, अष्टमूर्ति रस २ ग्राम, मुक्तापंचामृत ५ ग्राम, रौप्य भस्म २ ग्राम, अर्जुन घनसत्व १० ग्राम, वंशलोचन ५ ग्राम। सभी घोंटकर ६० मात्रा। १²२ मधु के साथ। 
४. जुमरासव (स्वास्थ्यवर्धक/स्वानुभूत) २० मि.ली. समभाग जल के साथ भोजनोपरान्त। 
५. खाने के बाद- कपूर कचरी घन २५० मि.ग्रा., मधुयष्टी घन २५० मि.ग्रा. भृंगराजघन २०० मि.ग्रा. और अविपत्तिकर चूर्ण ५ ग्राम मिलाकर भोजन के बाद। 
उपर्युक्त चिकित्सा व्यवस्था पत्र से सम्प्राप्ति का विघटन होने लगा और स्रोतोरोध दूर होने लगा, जिससे वायु अव्याहत होने लगा। सबसे बड़ी बात तो यह होने लगी कि श्रीमती कमला देवी के शरीर में ‘ओजवृद्धि’ होने लगी। ध्यान रहे- बिना ओज संरक्षण, ओजवृद्धि और ओज संचय के ‘हृदय’ के स्वास्थ्य की कल्पना ही बेकार है। चरक ने स्पष्ट कहा है- ‘‘हृद्यं यत्स्याद्यदौजस्यं।।’’ च.सू. ३०।। यही कारण है कि अंग्रेजी चिकित्सा होती रहती है और न मरने की उम्र वाला रोगी धीरे-धीरे मरता जाता है। क्योंकि उनके यहाँ ‘ओज’ पर कोई ध्यान देने का सिद्धान्त ही नहीं है। 
श्रीमती कमला देवी को आहार में मूँग की दाल, पतली रोटी, हरी सब्जी, गोघृत हल्का दिया जाता रहा। 

इस प्रकार औषधियों में रोगबल, दोष, दूष्य आदि को ध्यान में रखते हुये औषधियों में परिवर्तन किया जाता रहा। 
यद्यपि कमला देवी दूसरे माह से निरोग महसूस करने लगीं पर औषधियाँ लगातार दो साल तक चलीं, उनके लड़के श्री विनोद कुमार गर्ग के बड़े मनोयोग से इलाज किया। 
दो साल बाद जब उन्होंने फिर एंजियोग्राफी करायी तो डॉक्टर भी देखकर आश्चर्य चकित रह गये कि इनका हार्ट तो २० साल के जवान की तरह हो गया है। यद्यपि न भी एंजियोग्राफी करायें तो जब सारे रोग के लक्षण साँस फूलना, दर्द, भारीपन, मलावरोध, अरुचि जैसे-जैसे मिटते जायें वैसे-वैसे हृदय रोगी को मस्त और निश्चिन्त होते जाना चाहिए कि मैं चकाचक हूँ। 
इस प्रकार प्रयोगों, चिकित्सानुभवों और देखे गये केसों के आधार पर हम सभी को सलाह देते हैं कि जब भी अंग्रेजी डॉक्टर हार्ट में स्टेंट, बाईपास सर्जरी का दबाव दें तो उसकी बिल्कुल न सुनें और आयुष कार्डियोलॉजी की शरण लेना चाहिए निश्चित् रूप से हार्ट के ऑपरेशन, स्टेंट से बचेंगे और लम्बी स्वस्थ उम्र मिलेगी। 


श्रीमती कमला देवी के बेटे श्री विनोद गर्ग कहते हैं-.

स्टेंट फेल मुझे भी आयुष से मिला नया जीवन :




सन् २०१० से मेरी माँ को सीने में दर्द होना शुरू हुआ और चलने में साँस फूलने लगी। पहले सतना के अस्पताल और डॉक्टरों को दिखाते रहे तो उन्होंने बताया कि हार्ट में परेशानी बताया और आगे दिखाने की सलाह दी। हम जबलपुर सिटी हॉस्पिटल ले गये वहाँ एंजियोग्राफी की फिर बताया कि ७० प्रतिशत ब्लॉकेज हैं। वहाँ के डॉक्टरों ने डरवाया कि यदि एंजियोप्लास्टी (स्टेंट) नहीं करवायेंगे तो कभी भी जान जा सकती है। हम लोग डर गये और माता जी के हार्ट में स्टेंट डलवा दिया। दवाइयाँ भी चलतीं रहीं। किन्तु २ साल बाद फिर साँस फूलने लगी और सीढ़ियाँ चढ़ने तक में तकलीफ होने लगी। हम फिर जबलपुर के सिटी अस्पताल ले गये उन्होंने जाँच करवायी और कहा कि अब हार्ट में फिर दिक्कत आ गयी है और ऑपरेशन करना पड़ेगा, अन्यथा मरीज खत्म हो जायेगा। 
हम परेशान थे ही तभी एक मित्र ने मुझे चित्रकूट के आयुष ग्राम ट्रस्ट की आयुष कार्डियोलॉजी का पता बताया और विश्वास दिलाया कि यह बहुत बड़ा आयुष संस्थान है जहाँ हार्ट, किडनी जैसे रोगों पर काम हो रहा है। लगातार रोगी ऑपरेशन व स्टेंट से बच रहे हैं। 
मैं माता जी को लेकर आयुष ग्राम (ट्रस्ट) के आयुष ग्राम चकित्सालयम्, चित्रकूट गया। पर्चा बना, हमारा नम्बर आने पर डॉक्टर साहब ने देखा तथा नाड़ी और जीभ देखी। पेशाब और खून की जाँच करवायी फिर कहा कि आप बिल्कुल निश्चिन्त रहें आपको न तो ऑपरेशन कराना पड़ेगा न ही स्टेंट डलवाना पड़ेगा। २ सप्ताह तक पंचकर्म की कुछ थैरापी दी गयीं, खान-पान परिवर्तित किया तथा लाइफ स्टाइल ठीक किया, औषधियाँ चलाई गयीं। 
माता जी को पहले महीने से ही आराम मिलने लगा और ३ माह में तो मेरी माँ ऐसा महसूस करने लगीं जैसे कोई बीमारी ही न हो। 
हमने आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूट का लगातार दो साल तक इलाज किया। इतना बढ़िया परिणाम आया कि दो साल के इलाज के बाद जब हमने माता जी को लेकर फिर सिटी हास्पिटल जबलपुर में दिखाया और डॉक्टरों ने एंजियोग्राफी करके जाँच की तो रिपोर्ट देखकर दंग रह गये और बोले कि अब ऑपरेशन की कोई जरूरत नहीं है। 
मैं उन दिनों को सोचकर एक बार सिहर जाता हूँ जब मेरी माँ को एक बार एंजियोप्लास्टी (स्टेंट) के बाद २ साल बाद फिर ऑपरेशन के लिए बोल दिया। यदि आयुष ग्राम (ट्रस्ट), चित्रकूट का विकल्प नहीं मिलता तो पता नहीं क्या होता। 

विनोद कुमार गर्ग
गौशाला रोड, गढ़िया टोला, वार्ड नं.-०३, 
शिव मंदिर के पास, सतना (म.प्र.)



आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
           आयुष ग्राम चिकित्सालयम, चित्रकूट 
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  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी                                                आयुर्वेदाचार्य, पी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.)                   एन.डी., विद्यावारिधि, साहित्यायुर्वेदरत्न
          ‌‌‍‌‍'प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव'                              
डॉ परमानन्द वाजपेयी 
          बी.ए.एम.एस., एम.डी.(अ.)

डॉ अर्चना वाजपेयी                                                                    एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 

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