यदि खुद न खराब करें तो ३०० साल तक स्वस्थ रहता है अपना हार्ट


९ जुलाई २०१७ रविवार का दिन आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट  में चित्रकूट  के न्याय विभाग के कई लोग आ गये। साथ में एक बुढ़िया को व्हील चेयर में बैठाये लाये। परिचय दिया कि चित्रकूट  के एक सिविल जज की ये रिश्तेदार हैं।
व्हील चेयर में बैठी वृद्धा के साथ वाले बहुत ही बदहवास में थे। उन्होंने बताना शुरू किया कि ये मेरी माता जी श्रीमती विद्यावती जी हैं। उन्होंने बताना शुरू किया-
  • कि ६ जून २०१७ को शाम को बैठे-बैठे माता जी के दिल और कन्धे में तथा हाथों में बहुत तेजी से दर्द शुरू हुआ तो जल्दी-जल्दी स्थानीय नर्सिंग होम में लेकर गये, वहाँ डॉक्टरों ने इंजेक्शन आदि दिये और गोरखपुर रिफर कर दिया। 
  • गोरखपुर में ‘सवेरा हार्ट एण्ड आई सेण्टर’ में दिखाया। वहाँ पर इंजियोग्राफी कराने को कहा गया।
  • जब जाँच करायी तो बताया कि एक आर्टिरी १० प्रतिशत, दूसरी भी १० प्रतिशत और तीसरी ८५ प्रतिशत ब्लॉकेज है। 
  • यह देखकर उन्होंने संजय गाँधी पीजीआई लखनऊ रिफर कर दिया। 
  • पीजीआई लखनऊ में १८ जून २०१७ को नवीन गर्ग जी से मिले, उन्होंने जाँचें देखीं और कहा कि एंजियोप्लास्टी करना होगा। हमसे पैसा भी जमा करा लिया गया। 
  • लेकिन पुन: उन्होंने एंजियोग्राफी की तो बताया कि ब्लॉकेज अधिक हैं अत: एंजियोप्लास्टी नहीं बल्कि बाईपास सर्जरी करेंगे। 

हमने कहा कि चलिये वही कर दीजिये। लेकिन डॉक्टर साहब ने कहा कि मेरे पास दो-दो साल के एप्वायमेण्ट हैं जिनकी तारीख आज है और यह कहकर वार्ड से बाहर कर दिया। 

  • तब हमें किसी ने सलाह दी कि अब आप रीजेन्सी कानपुर हार्ट हास्पिटल चले जायें। मैं तुरन्त माँ को लेकर कानपुर गया। वहाँ डॉक्टर ने जाँचें देखकर कहा कि ‘बाईपास सर्जरी’ होगी। हमने रीजेन्सी के डॉक्टर से कहा कि आप भर्ती कर लीजिये। उन्होंने कहा कि आपको एक हफ्ते की दवा देता हूँ। आप इन्हें खिलाकर फिर मेरे पास आयें। दवा लेकर हम गोरखपुर आ गये। दो ही दिन दवा खाया होगा कि सीने में बहुत ही तेज दर्द हुआ। हम फिर लेकर गोरखपुर भागे। वहाँ जाँच हुयी और उन्होंने कानपुर रीजेन्सी फिर भेज दिया। सोचें ७३ साल की माँ को लेकर पूरा परिवार कितना परेशान था। 
  • २७ जून २०१७ को कानपुर वापस आ गये, भर्ती हो गये। वहाँ उन्होंने २८ जून को हार्ट का ऑपरेशन करने की डेट दे दी। 
  • किन्तु दूसरे दिन एक दूसरे डॉक्टर आये और उन्होंने चेक-अप किया और कहा कि इन्हें माइल्ड अटैक फिर आ गया है, अत: १५ दिन तक ऑपरेशन नहीं कर सकते। अत: पहले इन्हें आईसीयू में भर्ती करो। 
  • ४ दिन तक आईसीयू में भर्ती किया। चौथे दिन फिर जाँच किया और कहा कि अब बाल्व में एक तरफ सूजन है। अब माता जी को आईसीयू से जनरल वार्ड में भर्ती करा दिया। 
  • इस प्रकार पुâटबाल की तरह घुमाते-घुमाते माता जी का खाना-पीना पूरी तरह बन्द हो गया। माता जी कुछ भी खातीं तो तुरन्त उल्टी हो जाती। रीजेन्सी में १ हफ्ते तक ऐसा ही चलता रहा। 
  • अब डॉक्टरों ने चेक किया और बताया कि लिवर में सूजन है, शरीर में सोडियम की मात्रा कम हो गयी है। कुछ दवाइयाँ, इंजेक्शन चलाते रहें। 
  • ४ जुलाई २०१७ को रीजेन्सी में पुन: पूरी जाँच की गई और बताया गया कि हार्ट में दोनों ओर सूजन है और मरीज को घर ले जाइये। हम कुछ दिन बाद सर्जरी के लिये सोचेंगे। ८ जुलाई २०१७ को हमें रीजेन्सी से डिस्चार्ज कर दिया गया। 
  • माता जी जीवन मृत्यु से जूझ रही थीं। हम परेशान थे क्या करें तभी हमें यहाँ के आयुष अस्पताल के बारे में पता चला। हम ९ जुलाई २०१७ रविवार को माता जी को किसी तरह लेकर यहाँ आ गये।
  • इतने दिन में माता जी बिल्कुल टूट चुकी थीं। नाड़ी परीक्षण किया तो पाया कि माता जी (श्रीमती विद्यावती सिंह) में भयानक रसधातु की विकृति थी। शरीर का वात (Air/प्राणवायु आदि) क्षय अवस्था में तथा ‘कफ’ दोष भी प्रवृद्ध था। अग्नि की मन्दता थी जिससे शरीर में आम विष का निर्माण हो रहा था। 

परीक्षण (निदान, सम्प्राप्ति) से पता चल गया कि रोग और रोगिणी की दशा को अस्पतालों ने बिगाड़ दिया है। हमने माता जी के बेटे श्री विमल आनन्द सिंह जी से पूछा कि आप हमसे क्या उम्मीद रखते हैं। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि आप मेरी माता जी को वैसा ही कर दीजिये जैसे दो माह पहले थीं। हमने कहा कि चलो पूरा प्रयास करते हैं।



हमने इमरजेन्सी वार्ड में रखने की सलाह दी क्योंकि लगता था कि मरीज को आज कुछ हो सकता है या कल। 


चिकित्सा व्यवस्था-


श्रीमती विद्यावती सिंह की दो प्रकार से चिकित्सा की गयी। उनमें प्राणवह स्रोतस् विकृति के उपद्रव प्रबल थे, तो सर्वप्रथम निम्नांकित औषधि व्यवस्था व थैरेपी दी गयीं-
 ¬ रत्नाकर रस १२५ मि.ग्रा., स्वर्ण वात गजांकुश १२५ मि.ग्रा., कपूर कचरी ५०० मि.ग्रा. घोंटकर १²२ शहद से।
 ¬ दोपहर व रात में- स्वर्ण मुक्तादि गुलिका १ गोली, कस्तूर्यादि वटी १ गोली मिलाकर।
 ¬ दशमूल, पुनर्नवा, अर्जुन त्वक् का क्वाथ और मधु, सैन्धव लवण, यवक्षार मिलाकर निरूह वस्ति। 
           थैरेपी और उपर्युक्त चिकित्सा व्यवस्था से श्रीमती विद्यावती को २४ घण्टे में सुधार आ गया। उनकी उल्टी बन्द हो गयी। ३६ घण्टे बाद तो वे अपने से चलकर शौचालय तक जाने लगीं। पाँचवें दिन धीरे-धीरे उन्होंने टहलना शुरू कर दिया। उन्हें अंग्रेजी डॉक्टर जो २० प्रकार की दवाइयाँ खिला रहे थे, उन्हें कम किया। छठें दिन उनकी २० प्रकार की अंग्रेजी दवाओं में से १६ प्रकार की गोलियाँ बन्द करा दीं। उन्हें एक समस्या थी कि रात में अचानक घबराहट शुरू हो जाती, जिससे घर के लोग परेशान हो जाते। अंग्रेजी डॉक्टरों ने नींद की दवाइयाँ दे रखी थी, उन्हें बन्द करा दिया था। उधर रसधातु का असंतुलन था ही। ‘रसधातु’ की विकृति में घबराहट होती ही है। उन्हें बताया गया कि आप परेशान न हों। १५-२० दिन बाद यह समस्या भी खत्म हो जायेगी। १० दिन बाद तो माता (श्रीमती विद्यावती सिंह) जी अच्छी तरह घूमने लगीं। जब वे सुबह लान में घूमतीं, तो सभी बहुत खुश होते।
अब इमरजेन्सी की स्थिति खत्म हो गयी तो १० दिन बाद निम्नांकित चिकित्सा व्यवस्था परिवर्तित की गयी-
१. रत्नाकर रस १२५ मि.ग्रा., विश्वेश्वर रस (हृदय रोग) १२५ मि.ग्रा., वृ. वातेश्वर रस ५० मि.ग्रा. अर्जुन घनवटी १ गोली, वंशलोचन २५० मि.ग्रा., पोहकरमूल चूर्ण २५० मि.ग्रा. सभी घोंटकर ६० मात्रा। १²२ शहद से चाटें।
२. जटामांसी, मालकांगनी, वचा, अश्वगन्धा, खुरासनी अजवायन २५०-२५० मि.ग्रा. और मुक्तापिष्टी १२५ मि.ग्रा. घोंटकर दोपहर व रात शहद से।
३. सितोपलासव २० मि.ली. समभाग जल मिलाकर दिन में २ बार। भोजनोपरान्त।
अभ्यंग, हृद्वस्ति, गरमपादस्नान, योगबस्ति, यापनबस्तियों का प्रयोग किया।
पथ्याहार में- कृशरा, यूष, मूँग की दाल, रोटी, पुराना चावल, पाचकाग्नि को ध्यान में रखकर दिया गया।
श्रीमती विद्यादेवी सिंह जी को उनके बेटे ने एक माह तक यहाँ रखा, एक माह में तो वे नया जीवन ही पा गयीं। अब १ माह की औषधियाँ लेकर घर चले गये।
तब से उन्होंने अनेकों हृदय रोगियों को आयुष चिकित्सा हेतु सलाह दी और कई लोगों को एंजियोप्लास्टी (स्टेंटिंग) के आडम्बर से बचाया।
एक साल से हैं पूर्ण स्वस्थ
श्रीमती विद्यावती सिंह नियमित औषधियाँ और खान-पान चलते हुये आज भी स्वस्थ और कुशल हैं। बीच में एक बार पुन: उन्हें पंचकर्म हेतु सलाह दी गई ताकि जो भी विकार एकत्र हुये हों वे बाहर हो जायें। तब उनके बेटे ने दिनांक १० मार्च २०१८ को लाकर पुन: १५ दिन हेतु यहाँ रखा।
आज एक वर्ष हो गये, जिस वृद्धा को इन अंग्रेजी डॉक्टरों और अस्पतालों ने फुटबाल की तरह इधर से उधर फेंका था वे आयुष चिकित्सा से कितनी सहजता से केवल स्वस्थ ही नहीं हो गयीं बल्कि आज भी स्वस्थ हैं। न हार्ट का ऑपरेशन कराना पड़ा, न स्टेंट न बाईपास।
विचार करने की बात है कि आखिर हमारा भारतवर्ष ऐसे अस्पतालों और ऐसे डॉक्टरों से कब मुक्त होगा जिससे विद्यावती सिंह जैसी माता जी फुटबाल की तरह न भटकें ।
अन्त में हम एक बात लिखना नहीं भूलेंगे कि श्रीमती विद्यावती सिंह के बेटे श्री विमल आनन्द सिंह और उनकी पत्नी (पुत्रवधू) जिस लगन, निष्ठा और समर्पण भाव से सेवा कर रहे थे उसे देखकर उनकी सेवा को प्रणाम करने का मन करता था। इस युग में जब आज के नवयुवक माता-पिता को वृद्धाश्रम में छोड़ रहे हैं, वहीं श्री विमल आनन्द सिंह व उनकी धर्म पत्नी जैसे महामानव माता जी को पुनर्जीवन देने में सहयोगी थे।
इस चिकित्साऽनुभव लिखने का उद्देश्य मात्र इतना है सभी को शिक्षा व ज्ञान मिले कि हृदय रोगियों को पुनर्जीवन आयुष से मिल सकता है। विद्यावती  सिंह के पुत्र श्री विमल आनन्द सिंह ने अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किये-
६ जून २०१७ को एक दिन अचानक शाम को बैठे-बैठे ही मेरी माता जी श्रीमती विद्यावती सिंह के दिल और कंधे में तथा हाथों में बहुत तेजी से दर्द शुरू हुआ। बस! यहीं से शुरू हो गया, अंग्रेजी डॉक्टरों द्वारा माँ को फुटबाल की तरह दौड़ाना। अस्पताल में साधारण हालत में पहुँची और इन अस्पतालों ने पहुँचा दिया आईसीयू में। अंग्रेजी अस्पतालों में माँ मौत से जूझ रही थी तभी किसी से आयुष ग्राम अस्पताल के बारे में पता चला।
०९ जुलाई २०१७ दिन रविवार को यहाँ हम जब यहाँ आये उस समय माता जी की दशा चलने की बिल्कुल नहीं थी तो हम उन्हें चित्रकूट व्हील चेयर में बैठाकर लाये फिर थोड़ी देर बाद डॉ. साहब ने देखा पूरी जाँच वगैरा देखी और दवा लिखी फिर मुझसे पूछा आप हमसे क्या उम्मीद रखते हैं, क्या चाहते हैं। तो मैंने हाथ जोड़कर बोला, कि मेरी माता जी को आप वैसा कर दीजिये जैसे वो दो माह पहले थीं। तो डॉ. साहब ने कहा ठीक है मैं कोशिश करता हूँ।
आप विश्वास करें कि जैसे ही यहाँ उनकी आयुष चिकित्सा शुरू हुयी तो आयुष चिकित्सा से उन्हें ऐसा आराम मिलने लगा कि तीसरे दिन माता जी बिना सहारे के शौच के लिए गयीं और पाँचवें दिन से धीरे-धीरे  उन्होंने टहलना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि ऐसे कितने ही रोगी यहाँ ऐसे ही तेजी से ठीक हो रहे थे।
मैं सभी को सलाह देता हूँ कि एलोपैथ के आडम्बर से बचें। एलोपैथ में जाँचें जरूर करायें पर दवाइयाँ आयुष चिकित्सा में करायें। हमारे ऋषियों, मुनियों की विधा, पूर्वजों की विधा आयुर्वेद चिकित्सा बहुत ही उत्तम चिकित्सा है, जीवन देने वाली चिकित्सा है। अच्छा अस्पताल होना चाहिए।
आयुष ग्राम (ट्रस्ट) चिकित्सालय, चित्रकूट ऐसा बड़ा आयुर्वेद का वह अस्पताल है। यहाँ बहुत बड़ी सेवा हो रही है, बहुत बड़ा लोक कल्याण हो रहा है।
यहाँ इतने अच्छे रस, खरलीय रसायन हैं कि रोज न जाने कितने हार्ट, किडनी, रीढ़ के रोगी जीवनदान पा रहे हैं।




  आयुष ग्राम ट्रस्ट चित्रकूट द्वारा संचालित
           आयुष ग्राम चिकित्सालयम, चित्रकूट 
            मोब.न. 9919527646, 8601209999
             website: www.ayushgram.org
  डॉ मदन गोपाल वाजपेयी                                                आयुर्वेदाचार्य, पी.जी. इन पंचकर्मा (V.M.U.)                   एन.डी., विद्यावारिधि, साहित्यायुर्वेदरत्न
          ‌‌‍‌‍'प्रधान सम्पादक चिकित्सा पल्लव'                              
डॉ परमानन्द वाजपेयी 
          बी.ए.एम.एस., एम.डी.(अ.)

डॉ अर्चना वाजपेयी                                                                    एम.डी.(कायचिकित्सा) आयुर्वेद 




                                    





    Post a Comment

    3 Comments